Vitamin A deficiency in child, बच्चा बार-बार बीमार हो तो हो जाएं सावधान

बच्चा बार-बार बीमार पड़े, तो हो जाएं सावधान :-

विशेषज्ञों का मानना है कि, बार-बार बीमार पड़ने वाले ज्यादातर बच्चों को व्यक्तिगत साफ सफाई के बारे में नहीं पता होता, जैसे कि खाना खाने से पहले भी अच्छे से हाथ धोना और प्रतिदिन स्नान करना आदि। जब बच्चे सफाई से नहीं रहते तो वे अनेक प्रकार के संक्रामक कारकों से ग्रसित हो जाते हैं। बच्चों में हानिकारक रोगाणुओं का संक्रमण होने से शरीर में पोषक तत्व नष्ट होने लगते हैं और बच्चे का कुपोषण ग्रस्त होने की सम्भावना बन जाती है। कुपोषण के कारण शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। 

Vitamin A deficiency in child

अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार हो जाता है, इस कारण उसकी आए दिन स्कूल की छुट्टियाँ भी अधिक हो जाती है। अतः आप कतई नजरअंदाज ना करें। इससे ना सिर्फ बच्चे की पढ़ाई पर असर पड़ता है, बल्कि उसका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित हो जाता है। बच्चों में हानिकारक रोगाणुओं के संक्रमण के कारण विटामिन- ए की कमी होती है और बच्चे का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो सकता है।

बच्चों में विटामिन ए (Vitamin- A) की कमी होना बहुत बड़ी समस्या है। Vitamin- A की कमी से बच्चे कमजोर हो जाते हैं और इनमें से कुछ बच्चे तो आंखों की अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। बल्कि युवा और अधिक उम्र के लोग भी Vitamin- A की कमी से पीड़ित हो जाते हैं, लेकिन सबसे अधिक नुकसान बच्चों को ही होता है। Vitamin- A की कमी से बच्चों में मृत्यु दर भी बढ़ जाती है। अकेले भारत वर्ष में विश्व के एक चौथाई बच्चे Vitamin- A की कमी से पीड़ित है, क्योंकि कुछ को तो पौष्टिक आहार नहीं मिलता, और कुछ अन्य कारणों से Vitamin- A की कमी से पीड़ित होते हैं। 

आंकड़ों की बात की जाए तो, हर वर्ष 20000 बच्चे Vitamin -A की कमी से दृष्टिहीन भी हो जाते हैं और अनेक बच्चे अनेक प्रकार के संक्रमण से ग्रस्त हो जाते हैं। 

बच्चों में Vitamin A की उपयोगिता :-

Vitamin- A , नेत्र के देखने की क्षमता को बढ़ाता है व संक्रामक रोगों से लड़ने की ताकत प्रदान करता है, क्योंकि Vitamin- A की सहायता से मानव प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है। आंखों के प्रत्येक हिस्से को Vitamin- A मजबूत करता है। 

यदि शरीर में विटामिन ए की पर्याप्त मात्रा उपस्थित है तभी मानव पाचन तंत्र खाये गये भोज्य पदार्थ से पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का अवशोषण कर पाता है। अतः यदि बच्चों में विटामिन ए की कमी है, तो उनमें कैल्शियम की कमी भी हो जाएगी, जिससे बच्चों में अस्थि विकृति, या हड्डियां कमजोर व टेढ़ी हो जाती हैं।

बच्चों में Vitamin A की कमी होने का कारण :-

बच्चों में Vitamin- A की कमी होनी की सबसे बड़ी वजह डायरिया (दस्त या अतिसार) और पेट के कीड़े हैं। जब बच्चे इन रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं, तो संभव है कि उनमें विटामिन ए की कमी अवश्य हो जाएगी। खसरा रोग के बाद भी विटामिन ए की सबसे ज्यादा कमी हो जाती है। यह देखा गया है कि बच्चों को लम्बे समय तक डायरिया होने के बाद उनके शरीर में विटामिन ए की कमी हो जाती है, जबकि वे संतुलित भोजन करते रहते हैं। डायरिया और पेट के कीड़े के कारण बच्चों की आंते कमजोर हो जाती हैं, ऐसे में वे पदार्थों से विटामिन ए को अवशोषित नहीं कर पाती और विटामिन ए के मल के साथ बाहर आ जाता है।

5 साल से कम उम्र के लगभग 1.8 मिलियन बच्चे डायरिया और निमोनिया से ग्रस्त पाये गये हैं, क्योंकि वह रोजमर्रा की जिंदगी में नियमित रूप से व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान नहीं रखते। बच्चों में डायरिया होने का मुख्य कारण संक्रमण है और इसकी वजह रोज स्नान न करना और भोजन करने से पहले ठीक से हाथ न धोना है। अगर बच्चा दिन में 3 बार या उससे ज्यादा ढीला मल निष्कासित करता है तो यह डायरिया होने के लक्षण हो सकते हैं।

बच्चों में आंतों से संबंधित संक्रमण मानसिक विकास में भी बाधा पहुंचाता है। आंतों में संक्रमण से यह आंत्र तक सीमित ना होकर बल्कि पूरे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे पाचन नलिका से लेकर सभी अंग शामिल हैं। यह संक्रमण मुख्यतः बैक्टीरिया व वायरस के कारण होते हैं। 

भारत जैसे विकासशील देश में 1 साल से 5 साल के बच्चों में डायरिया का संक्रमण प्रायः अधिक होता है और इसकी वजह से कुपोषण की समस्या हो जाती है। इसका सबसे प्रमुख कारण है डायरिया के दौरान शरीर से तरल पदार्थ अधिक निकलने से है। इसका सही तरीके से इलाज न किया जाए तो समस्या बढ़ जाती है, जिससे शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास में भी रुकावट आ जाती है।

बच्चों में Vitamin- A की कमी होने के लक्षण :-

1. रतौंधी या नाइट ब्लाइंडनेस, रतौंधी में बच्चों को रात में बहुत कम दिखाई देता है। मरीज को सूरज ढलने के बाद नहीं दिखाई देता।

2. आंखों में ड्राइनेस (सूखापन या आंसुओं की कमी) हो जाती है, इसमें जलन, लाली और खुजली भी होने लगती है। इस रोग को जिरोसिस कहा जाता है।

3. आंखों की पुतलियां धीरे-धीरे सफेद होने लगती है। इस रोग को कार्नियल ओपेसिटी कहा जाता है। इसका समय पर इलाज नहीं हुआ तो, मरीज दृष्टिहीन भी हो जाता है।

4. आंखों की कार्नियां में घाव हो जाता है जो जल्दी नहीं भरता। इस रोग को कार्नियल अल्सर कहा जाता है।

5. बच्चा बार-बार किसी न किसी रोग से हमेशा पीड़ित रहता है, और बहुत कमजोर दिखता है।

6. बच्चों का पढ़ाई करते समय अधिक नींद आना व आंखें दुखने या पानी गिरने की समस्या हो तो यह विटामिन ए की कमी के लक्षण हैं।

बच्चों में Vitamin- A की कमी का निदान :-

Vitamin- A की कमी का आभास बच्चों की आंखों में होने वाली बीमारियों को देखने के बाद ही पता चलता है। इस पहचान के लिए उपरोक्त लक्षणों पर ध्यान देना चाहिये। इसके अलावा विटामिन ए की कमी से बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है और अनेक प्रकार के रोग से पीड़ित रहता है। Blood की जांच से विटामिन ए की कमी का ठीक-ठीक पता चल जाता है।

बच्चों में Vitamin- A की कमी दूर करने का उपाय :-

सबसे पहले बच्चे के पाचन तंत्र को ठीक करें। उसके लिए सबसे अच्छा तरीका किसी अनुभवी व विद्वान होम्योपैथिक चिकित्सक से बच्चे का इलाज कराएं, क्योंकि होम्योपैथिक औषधियां दुष्प्रभाव रहित तरीके से रोग को बड़ी सटीकता से ठीक कर देती हैं। अन्य किसी भी पद्धति के योग्य चिकित्सक से बच्चे का सही इलाज करा सकते हैं।

बच्चों में दवाओं के द्वारा विटामिन ए की कमी दूर करने के लिए इंजेक्टिवल और ओरल; दोनों प्रकार की दवाएं मार्किट में उपलब्ध हैं। अगर बच्चे की उम्र 6 माह से कम है तो, 50 हजार IU वाला विटामिन ए का इंजेक्शन केवल एक बार लगाया जाता है। यदि बच्चे की उम्र 6 माह से अधिक है तो 1 लाख IU वाला विटामिन ए का इंजेक्शन 6-6 महीने पर एक बार लगाया जाता है। 

बच्चों में पौष्टिक भोजन के द्वारा विटामिन ए की कमी दूर करने के लिए दूध, दही, मक्खन, हरी पत्तेदार सब्जियां, जैसे पालक, पुदीना, मूली, गाजर, चुकन्दर, टमाटर आदि और पीले मीठे फल जैसे आम, पपीता आदि को उचित मात्रा में सेवन कराया जाता है।

माता-पिता अपने बच्चों का नियमित ख्याल रखें। यदि बच्चे आंखों में खुजली की शिकायत करें, तो तुरंत आंख के विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। 

Conclusion

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में एकाग्रता और प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए विटामिन्स, खनिज लवण, इत्यादि की आपूर्ति के साथ-साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में सिखाएं। सरकार की तरफ से बच्चे में Vitamin- A की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अनेक योजनाएं चालू की गई है, फिर भी यह आवश्यक है कि बच्चों के माता-पिता बच्चों में Vitamin- A की कमी व अन्य कोई भी वह कारण, जो बच्चे के समग्र विकास में बाधक हो, को जानें और इसे दूर करने का स्वयं प्रयास करें।

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