Make a naughty baby wiser । चंचल बच्चे को समझदार ऐसे बनाएं !

Make a naughty baby/child wiser

जैसा कि सभी लोग जानते हैं और स्वीकार करते हैं कि बच्चे ही भावी भविष्य के निर्माता होते हैं और यह भी कहा जाता है कि "धन का बढ़ना ठीक है, लेकिन मन का बढ़ना ठीक नहीं।" अतः उन्हें समझदार, सुशिक्षित और अनुशासित बनाना प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य होता है। जो माता-पिता अपने बच्चों को सुशिक्षित, अनुशासित तथा समझदार बनाने की कोशिश नहीं करते, उनके बच्चे दुष्ट व दुराचारी प्रकृति वाले हो जाते हैं और सभ्य समाज के लिए कष्टदायक बन सकते हैं। 

जैसा कि कहा जाता है; मिट्टी के कच्चे बर्तनों को ही उचित आकार में ढाला जा सकता है, बर्तन के पक जाने पर उसका आकार नहीं बदला जा सकता और यदि पके बर्तनों के आकार को बदलने की चेष्टा की जाती है, तो वे टूट जाते हैं। इसी प्रकार, जब तक बच्चों की उम्र छोटी होती है या बच्चे छोटी उम्र के होते हैं तो उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए उचित शिक्षा देना चाहिए और बच्चों को अनुशासित रखते हुए उचित संस्कार प्रदान कराना चाहिए, ताकि बच्चे एक सुंदर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकें। यदि बच्चों को छोटी आयु में ही उचित संस्कार नहीं सिखाया गया, तो वे बड़े होकर भी दुष्ट प्रकृति वाले ही रहेंगे। अतः प्रत्येक माता पिता का कर्तव्य होता है कि वे अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने का भरपूर प्रयास करें, ताकि बच्चे बड़े होकर सुंदर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकें व बड़े होकर अच्छे व महान कार्य करें।

Make a naughty boy wiser

यदि आपका बच्चा आवश्यकता से ज्यादा चंचल है, तो आपको अधिक खुश नहीं, बल्कि सावधान होने की जरूरत है। कुछ बड़े होकर आपका बच्चा अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (ADHD) से ग्रसित हो सकता है। इस रोग से ग्रसित बीमारी में बच्चा अपने से अधिक उम्र के बच्चों की तरह व्यवहार करता है, लेकिन बुरा व्यवहार करता है, वह एकाग्र नहीं हो पाता है। यह बीमारी प्रायः 3 साल से अधिक उम्र के स्कूल जाने वाले बच्चों में देखने को मिल जाती है। इसकी वजह से आपके चंचल बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। वह चंचलता के कारण ठीक से पढ़ नहीं पाता है। 

सर्वेक्षण के मुताबिक अपने भारत देश में विद्यालय जाने वाले लगभग 4% बच्चों को यह बीमारी पायी जाती है। अब इस रोग से प्रभावित 60% बच्चे से ठीक नहीं हो पाते हैं। बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ-साथ चंचलता तो कम हो जाती है, लेकिन अच्छी एकाग्रता नहीं हो पाती है। बच्चा गलत कार्यों को करने का प्रयास करता है, वह जिद्दी भी हो जाता है और उत्तेजना में गलत निर्णय लेने लगता है और कुछ और बड़े होने पर वह नशे का सेवन भी प्रारम्भ कर सकता है।

अधिक चंचल बच्चों के लक्षण -

1. बच्चे का अपनी उम्र के हिसाब से अधिक चंचल होना,

2. स्थिर न बैठना व सदैव गलत कार्य करने की चेष्टा करना,

3. क्लास में भी कंफर्ट (अनुकूल) महसूस ना करना,

4. पढ़ाई में मन ना लगना, लिखावट सही ना होना, पढ़ाई से घृणा करना,

5. जानबूझकर गलतियां करना,

6. किसी सामूहिक कार्य के समय अपनी बारी का इंतजार ना करना, 

7. रोजमर्रा का काम भी ठीक से ना करना,

8. गंभीर बातों पर भी ध्यान ना देना, लापरवाह होना,

9. दो लोगों के बातचीत के दौरान बीच-बीच में अनावश्यक बोलना,

10. पढ़ाई के दौरान भी दूसरे फालतू कामों में उलझे रहना या ध्यान बंटाना ।

बच्चे का अधिक चंचल होने का कारण -

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (ADHD) जन्मजात बीमारी मानी गयी है। इन बच्चों में जन्म के समय इनके दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर हार्मोन की कमी होती है, जिसकी वजह से यह बीमारी होती है। इसके अलावा अनेक कारण ऐसे भी हैं जो इस बीमारी को उत्पन्न करते हैं, जैसे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालना, बिना कारण ही अधिक डांटना, हमेशा शिकायत करना, दूसरे बच्चों से अनावश्यक तुलना करना, माता-पिता से दूर रहना, उचित दिशानिर्देश के साथ संस्कार ज्ञान न सिखाना आदि हैं।

बच्चे का अधिक चंचल होने से बचाव -

1. ऐसे चंचल बच्चे की सबसे पहले पहचान करने की आवश्यकता होती है। अधिकांश माता-पिता या मानने को तैयार नहीं होते हैं कि उनका बच्चा मानसिक रूप से पीड़ित है। 

2. घर और बाहर लोग उससे ठीक से बर्ताव करें, ताकि उसके ऊपर मानसिक दबाव न बने।

3. यह जानने की कोशिश करें कि बच्चा क्यों पढ़ाई करना नहीं चाहता है।

4. उसके अच्छे काम को सराहें व उसकी प्रसंशा करें। कोई गलती करने पर उसे डांटने के बजाय समझाएं। समझाने के लिए शिक्षाप्रद कहानियों का सहारा लें।

5. पढ़ाई के समय माता-पिता मौजूद रहें। यदि वह पढ़ाई कर रहा है, तो उसे दूसरा काम करने को ना दें। 

6. क्लास और होमवर्क को टुकड़ों में बांट दें, जिससे वह बोझ न समझे।

7.  पढ़ाई के दौरान कुछ समय आराम करने को कहें, ताकि मानसिक दबाव महसूस ना करें।

8. रेखाओं व चित्रों के भीतर कलरिंग और पेंटिंग करवाएं, इससे बच्चों का ध्यान एकाग्र हो जाता है।

9. अच्छी-अच्छी पहेलियां हल करवाएं, इससे भी ध्यान लगता है।

10. मैचिंग वाला गेम खेलने को दें।

11. बच्चों को टीवी और रेडियो सुनने दें। टीवी व रेडियो पर वही चैनल रखें, जिन पर ज्ञानवर्धक बातें दिखाई व समझाई जाती हैं। बाद उनसे प्रेम से पूछे कि उसने क्या देखा, क्या सुना और क्या समझा और क्या समझना चाहता है। 

12. बच्चों को ज्ञानवर्धक कहानियों की किताबें उपलब्ध कराएं अथवा खुद समय निकालकर ज्ञानवर्धक कहानियों के माध्यम से उचित संस्कार व अच्छा आचरण करना सिखाएं।

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