Detailed information of mint । पुदीना की उपयोगिता

Detailed information of mint

पुदीना; जिसे अंग्रेजी में Mint कहा जाता हैं, यह मैंथा नामक पौधे के नाम से भी जाना जाता है। इसकी अनेक प्रजातियां विश्व में भिन्न-भिन्न वातावरण में पाई जाती हैं। 

पुदीना की तासीर/प्रकृति -  मध्यम

पुदीना, corn mint, field mint, या wild mint, नामक अनेक प्रकार वाला फूलों की एक प्रजाति है। इसका एक circumboreal वितरण है, जो यूरोप और पश्चिमी और मध्य एशिया के समशीतोष्ण क्षेत्रों, पूर्व में हिमालय और पूर्वी साइबेरिया और उत्तरी अमेरिका के समशीतोष्ण क्षेत्रों के स्थल पर झाड़ीनुमा वनस्पति के रूप में पाया जाता है। 

पुदीना का वैज्ञानिक वर्गीकरण (Classification of mint) --

पुदीना का वैज्ञानिक (Scientific) नाम -  Mentha arvensis (मेंथा अर्वेन्सिस)

पुदीना का वर्ग (Class) -  Mint (मिंट)

पुदीना का परिवार (Family) -  Lamiaceae (लैमियासी)

पुदीना का जगत (Kingdom) -  Plantae (प्लांटी)

पुदीना का गण (Order) -  Lamiales (लैमियालेस)

 Use of mint

 पुदीना की उपयोग (Benefits and uses of mint) -

पुदीना के हरे सुगन्धित पत्ते हमें तब याद आते हैं, जब हरी चटनी बनाते वक्त विषेश स्वाद व लाभ पाने की इच्छा हो और हमें चटनी केवल धनिया और हरी मिर्ची से ही बनाना पड़ रहा हो। वास्तविकता यह है कि यदि पुदीने का आभास हो जाए, तो पुदीने के अभाव में हरी चटनी उदास सी लगती है। विडंबना तो यह भी है कि भोजन को सांस्कृतिक ताजगी से भरने वाला पुदीना अक्सर मसालों में न गिनकर फूलों में गिना जाता है। इसे ज्यादातर लोग भोजन में सुगन्ध व सजावट के लिए ही इस्तेमाल करते हैं, किन्तु यह अनेक प्रकार से स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने वाला औषधीय पौधा है।

जंगली पुदीने से निकाले जा सकने वाले रासायनिक पदार्थों में मेन्थॉल, मेन्थोन, आइसोमेन्थोन, नियोमेंथॉल, लिमोनेन, मिथाइल एसीटेट, पिपेरिटोन, बीटा-कैरियोफिलीन, अल्फा-पिनीन, बीटा-पिनीन, टैनिन और फ्लेवोनोइड नामक रसायन शामिल हैं। पुदीने के अर्क और मेन्थॉल से संबंधित रसायनों का उपयोग भोजन, पेय, खांसी की दवाओं, क्रीम आदि में किया जाता है। मेन्थॉल का व्यापक रूप से दंत चिकित्सा देखभाल में उपयोग किया जाता है। पुदीना को मिलाकर बना एक माउथवॉश संभावित रूप से स्ट्रेप्टोकोकी और लैक्टोबैसिली बैक्टीरिया को रोकता है।

भोजन में सुगन्ध के लिए पुदीना -

अधिकांश लोगों को पुदीने के स्वाद और सुगंध का अहसास है। अवध के लोगों के भोजन में सदियों से पुदीने के ताजा हरे पत्तों का इस्तेमाल खुले हाथ से किया जाता है। शामी कवाव की इज्जत पुदीने से ही बढ़ती है, तो बिरयानी और पुलाव को पुदीना महमहा देता है। यही बात है कि हैदराबाद के दस्तरख्वान नामक भोजन के बारे में भी कही जाती है। केरल में ईसाई समुदाय, जो पारंपरिक लैंब रोस्ट नामक भोजन बनाता है, उसका साथ निभाने के लिए साथ ही मिंट साॅस ही उपयोग किया जाता है। ऐसा जान पड़ता है कि इस रूप में पुदीने का प्रयोग उन्होंने उन लोगों से सिखा जिनसे उनका संपर्क देश के दूसरे हिस्सों में पहले हो रहा था। बाकी के अनेकों मसाले तो उनके खुद के ही प्रांत के थे, इसीलिए पुदीना उन्हें आकर्षक लगा होगा।

सर्दी-जुकाम में पुदीने की चाय -

सर्दी-जुकाम, एलर्जी व इन्फ्लूएंजा जैसे कठिन रोगों के इलाज में सहायता के लिए पुदीने की पत्तियों की चाय बनाकर पीया जाता है। पुदीना की पत्तियों को नमक के साथ कच्चा भी खाया जा सकता है।

खांसी में पुदीना का सेवन लाभदायक माना जाता है। खांसी की मीठी गोलियों में पुदीने का तेल अनिवार्यतः मिला हुआ रहता है। स्वाद व स्वांस को स्वच्छ व सुवासित बनाने के लिए कई लोग च्युइंगम खाते हैं, जिसकी प्रभाव की बुनियाद स्पियरमिंट नामक जंगली पुदीने पर ही टिकी रहती है। 

सुगन्धित व ताजगीयुक्त भोज्य के लिए पुदीना -

पश्चिम क्षेत्रों में जहां सूखी वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों का महिमामंडन किया जाता है, वहां पुदीना नामक औषधीय पौधा तुर्की देश से लेकर इटली और फ्रांस तक विशेष रूप से लोकप्रिय है। पुदीना की पत्तियों से गर्मी का असर दूर करने वाला शरबत भी बनाया जाता है जिसे तुर्की नामक देश में जुलाब कहा जाता है। पुदीना को मूल फारसी गुलाब का अपभ्रंश शब्द माना जाता है। अमेरिका देश के दक्षिणी प्रांतों में, जहां अधिक गर्मी पड़ती है, वहां पुदीना से मिंट जुलैप नामक काॅकलेट बनाया जाता है। कद्दूकस से महीन किए गये पुदीना के पत्तों को बर्फ के पानी में डालकर हरा-भरा ताप निवारक संकटमोचक पेय बनाया जाता है। फ्रांस में भोजन के बाद कुछ मीठा हल्का पुदीने से बना पेय पीने का चलन है। इनमें से एक क्रैम द मेंथ नामक पुदीने से बना पेय है, जो पन्ने जैसा हरे रंग का होता है और खानपान के शौकीन लोगों के लिए वह रत्न के समान ही मूल्यवान होता है।

रायता और सलाद में सूखे मसाले, सजावट व सुगन्ध के साथ-साथ चबाने के लिए भी ताजे पुदीने की पत्तियों का  उपयोग किया जाता है।

बेहतर पाचन शक्ति के लिए पुदीना -

आयुर्वेद के अनुसार, पुदीना पाचक और वमन निरोधक गुणों वाला पौधा है, इसीलिए वैद्य लोग, हल्के पेट दर्द या अपच (अजीर्ण) के उपचार के लिए पुदीना नामक औषधि सेवन के लिए देते हैं। 

पुदीना में होने वाले रोग -

पुदीना पौधे में होने वाले दो मुख्य रोग, जो जापानी पुदीना (एम. अर्वेन्सिस वेर. पिपेरसेन्स) को महत्वपूर्ण रूप से नुकसान पहुंचाते हैं और इस रोग का कारण कवक-फफूंदी के हमले हैं। पुदीना में फफूंदी के हमले आमतौर पर केवल संयुक्त राज्य के पश्चिमी तट पर होते हैं, जहां मौसम धूमिल और आर्द्र हो रहता है, यह एक ऐसी स्थिति है जो फफूंदी को आकर्षित करती है। 

रस्ट फंगस, पुदीना में होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जो ज्यादातर मेंथा पौधों जैसे पेपरमिंट और स्पीयरमिंट के लिए आम रोग है। इस रोग का पुदीना के खेत में एक बार शुरुआत होने के बाद इसे नियंत्रित करने की लगभग कोई भी संभावना नहीं होने के कारण इन बीमारियों गम्भीर माना जाता है। पौधों के बाकी पत्तों को दूषित करने की संभावना को कम करने में मदद करने के लिए रोग से प्रभावित पुदीना के पौध हिस्सों के खोजे जाने पर उन्हें आम तौर पर तुरंत कांट-छांट कर हटा दिया जाता है।

Conclusion

अब अंतरराष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी प्राकृतिक उपचार के लिए  पुदीना हरा नामक पुदीना से बने अनेकों प्रोडक्ट बाजार में उतार चुके हैं। 

पुदीने का बेहतर स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए अब भारत सहित विश्व के अनेक देशों में लोग , गृहणियां, पेशेवर शेफों द्वारा और महंगे होटलों में पुदीने को मसाले के रूप में विशेष रूप से उपयोग में लाया जाता है। 

पुदीना खाद्य पदार्थों का स्वाद बढ़ाने के साथ ही आयुर्वेद की किताबों तक को ताजगी से भर देता है। इस पुदीने की अनमोल सुगन्ध बारहमासी मसाले की खूबियों से इतना ज्यादा है कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भोजन में पुदीना की दीवानी है।

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