Information of colon cancer or colorectal cancer

Colorectal cancer - बड़ी आंत्र का कैंसर

वर्तमान में कैंसर के अनेक प्रकार हैं, लेकिन इनके बीच विश्व भर में कोलोरेक्टल कैंसर पुरुषों में तीसरा सामान्य कैंसर (कुल का 10% यानी 6 लाख 63 हजार मामले) और महिलाओं में दूसरा सामान्य कैंसर (कुल का 9.4% यानी 5 लाख 71 हजार मामले) हैं। विश्वभर में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों की दर दोनों स्त्री-पुरूष संख्या की तुलना में 10 गुना तक भिन्न होती है अर्थात् कोलोरेक्टल कैंसर (CRC) के मामलों की दर अलग-अलग है। दक्षिणी एशियाई देशों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले प्रायः कम है, तो विकसित एशियाई देशों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले ज्यादा हैं। 

कोलोरेक्टल कैंसर ज्यादातर आर्थिक रूप से संपन्न देशों, जैसे कि फ्रांस, जापान, कोरिया और सिंगापुर में तेजी से विस्तार किया है। हालांकि विश्व भर के मुकाबले में भारत में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले बहुत कम दर्ज हुए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी लाइफस्टाइल (पाश्चात्य जीवनशैली) को अपनाने के कारण भारत में भी कोलोरेक्टल कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। 

Information of colon cancer

शोधकर्ताओं का कहना है कि, भारत में पिछले ती दशकों से कोलोरेक्टल कैंसर के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं क्योंकि अधिकांश भारतीय बहुत ज्यादा पश्चिमी देशों के लाइफस्टाइल (जीवनशैली) और खाने की आदतों को अपनाते जा रहे हैं। देश भर में मौजूद विभिन्न जनसंख्या ग्रुप और अस्पतालों से एकत्र आंकड़े काफी रोचक और विरोधाभासी प्राप्त हुए हैं। देश के सभी प्रान्तों में कैंसर के मामलों में रेक्टम (बड़ी आंत्र का वह भाग जो गुदा को जोड़ता है) कैंसर के मामले कोलन कैंसर से ज्यादा हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर महिलाओं में भी अधिक तेजी से फैल रहा है। विश्व भर में सबसे सामान्य कैंसर की सूची में कोलोरेक्टल कैंसर 15 वर्षों के भीतर मामलों की बढ़ोतरी के चलते 49% प्रतिशत बढ़कर यह 1990 में दूसरे स्थान पर आ गया था जबकि सन् 1975 में यह चौथे स्थान पर था। कोलोरेक्टल कैंसर के मामले भारत में के ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलते हैं। हालांकि देश भर में अभी कोलोरेक्टल कैंसर के मामले सीमित हैं। इसके विपरीत अमाशय के कैंसर और पित्ताशय में कैंसर के मामले में उत्तर-दक्षिण भारत में अधिक अंतर है। 

Colorectal cancer क्या है -

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत्र की भित्ति में होने वाला घातक ट्यूमर है जो पहले सुदम अर्बुद (benign tumor) के रूप में प्रकट होता है, फिर धीरे-धीरे दुर्दम अर्बुद (malignant tumor) में परिवर्तित हो जाता है। इस कैंसर की शुरुआत में किसी भी तरह के विशेष लक्षण नजर नहीं आते।

Colorectal cancer होने का कारण -

कोलोरेक्टल कैंसर होने का सामान्य कारण है, लोगों का अधिक रासायनयुक्त व अनियमित खाद्य का सेवन। कीमोथेरेपिस्ट डाॅक्टर्स के अनुसार, विकसित देशों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों की दर काफी ज्यादा है, इसकी वजह उनके गड़बड़ खानपान की शैली है। मांसाहार, कम फाइबर वाला आहार और फास्ट फूड का ज्यादा सेवन से कोलोरेक्टल कैंसर के मामले ज्यादा बढ़ते दिख रहे हैं।

लगभग 6% कोलोरेक्टल कैंसर आनुवंशिक कारणों से भी होता है, और लगभग दो तिहाई मामलों में लाइफस्टाइल (जीवनशैली) और खाने की आदत भी शामिल है। परिवार का परिवेश और जीवनशैली भी आंशिक रूप से कोलोरेक्टल कैंसर को उत्पन्न करने में भूमिका निभाते हैं। हालांकि कोलोरेक्टल कैंसर के निर्माण में जिन की भूमिका पर अध्ययन करने की विशेष जरूरत है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर के तथ्यों से यह सामने आया है कि UK और US के भारतीय प्रवासियों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले अधिक देखने को मिलते हैं, जो चिंता की बात है। वास्तव में लाइफस्टाइल और खानपान की खराब आदतें हीं कोलोरेक्टल कैंसर होने का प्रमुख कारण है। इसका तात्पर्य है कि भारत में कम आय से मध्यम आय व उच्च आय वर्ग की अर्थव्यवस्था वाले परिवारों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले अधिक बढ़ रहे हैं।

Colorectal cancer से बचाव -

विभिन्न अध्ययनों द्वारा मांसाहार व रेड मीट की खपत व कोलोरेक्टल कैंसर के बीच संबंध जानने की कोशिश लगातार की जा रही है। इसके साथ ही साथ विशेषज्ञ यह भी खोज रहे हैं कि डाइट (खुराक या भोजन) में  सब्जियों व फलों का सेवन कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने में प्रभावी कैसे हो सकता है।

चूंकि कोलोरेक्टल कैंसर की शुरुआत में किसी भी तरह के विचित्र लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए नियमित तौर पर जाॅंच कराना महत्वपूर्ण है। कोलोरेक्टल कैंसर का इलाज, उसके आकार, जगह और फैलने पर विशेष निर्भर करता है। इसके साथ-साथ रोगी की सेहत और उम्र का भी ख्याल रखा जाता है। कोलोरेक्टल कैंसर की प्रारम्भिक अवस्था में अर्थात्‌ जब तक कोलोरेक्टल कैंसर सुदम अर्बुद के रूप में है, उस समय होम्योपैथिक औषधियों से पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है और दुर्दम रूप में होने पर भी होम्योपैथिक औषधियों से ठीक होने की सम्भावना रहती है।  सामान्यतः सर्जरी कोलोरेक्टल कैंसर का सटीक इलाज है। 

हमारे भारत जैसे देश में जहां आबादी बहुत ज्यादा है, वहां कोलोरेक्टल कैंसर के मामले फिर भी कम हैं। इसके बावजूद इसके इलाज में देरी या फिर एक जगह से दूसरी जगह अनावश्यक रेफर करने से बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा देश में इलाज की पद्धति में भी कुछ कमी है, क्योंकि कुछ चिकित्सक लोग अधिक पैसे अर्जित करने के लोभ में रोगी के रोग का सटीक इलाज नहीं करते। इसके साथ-साथ कोलोरेक्टल कैंसर के एडवांस स्टेज में कीमियोथेरेपी व रेडियोथैरेपी भी विशेष भूमिका निभाते हैं। फिर भी विकसित आधुनिक तौर-तरीकों से रोग के इलाज में बेहतरीन सुधार हुए हैं।

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