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दुनिया में जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई ?

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दुनिया में जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई ? 

इस प्रश्न का उत्तर भले ही वैज्ञानिकों के पास ना हो, लेकिन हिंदू धर्म के पास इस प्रश्न का उत्तर है ! आज के वैज्ञानिक लोग सृष्टि में जीवों की उत्पत्ति छोटे छोटे सूक्ष्म अणुओं और उससे धीरे-धीरे बढ़े अणुओं का निर्माण और फिर उससे जीवों के निर्माण का होना मानते हैं। लेकिन हिंदू धर्म सृष्टि में डायरेक्ट भिन्न-भिन्न जीवों की उत्पत्ति को मानता है। इसका प्रमाण हम वाल्मीकि रामायण से देते हैं-

दुनिया में जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई ?

" पिता का मित्र जानकर श्री रामचंद्र जी ने गृध्र का आदर किया और शांत भाव से उनका कुल एवं नाम पूछा। श्री राम का यह प्रश्न सुनकर उस पक्षी जटायु ने उन्हें अपने कुल और नाम का परिचय देते हुए सृष्टी में समस्त प्राणियों की उत्पत्ति का क्रम बताना आरंभ किया। 

महाबाहु रघुनंदन ! पूर्व काल में जो-जो प्रजापति हो चुके हैं, उन सभी का मैं प्रारम्भ से ही वर्णन करता हूं, सुनिए-

उन प्रजापतियों में सबसे पहले कर्दम हुए। तदनंतर दूसरे प्रजापति का नाम विकृत हुआ। तीसरे शेष, चौथे संश्रय और पांचवें प्रजापति पराक्रमी बहुपुत्र हुए। छठे स्थाणु और सातवें मरीचि, आठवीं अत्रि, नवें महान शक्तिशाली क्रतू, दसवें पुलस्त्य, ग्यारहवें अङ्गिरा, बारहवें प्रचेता (वरुण) और तेरहवें प्रजापति पुलह हुए। चौदहवें दक्ष, पंद्रहवें विवस्वान्, सोलहवें अरिष्टनेमि और सत्रहवें प्रजापति महातेजस्वी कश्यप हुए। रघुनंदन ! यह कश्यप जी अंतिम प्रजापति कहे गए हैं।

महायशस्वी श्रीराम ! प्रजापति दक्ष के साठ यशस्विनी कन्याएं हुई, जो बहुत ही विख्यात थी। उनमें से आठ कन्याओं को प्रजापति कश्यप जी ने पत्नी रूप में ग्रहण किया। जिनके नाम इस प्रकार हैं- अदिति, दिति, दनु, कालका, ताम्रा, क्रोधवशा, मनु और अनला। 

तदनंतर उन कन्याओं से प्रसन्न होकर कश्यप जी ने उनसे कहा- 'देवियों ! तुम लोग ऐसे पुत्रों को जन्म दोगी, जो तीनों लोगों का भरण पोषण करने में समर्थ और मेरे समान तेजस्वी होंगे।' 

महाबाहु श्रीराम ! इनमें से अदिति, दिति, दनु और कालका; इन चारों ने कश्यप जी की कही हुई बात को मन से ग्रहण किया, परंतु शेष अन्य चार स्त्रियों ने उधर मन नहीं लगाया। उनके मन में वैसा मनोरथ नहीं उत्पन्न हुआ।

शत्रुओं का दमन करने वाले रघुवीर ! अदिति के गर्भ से 33 (तैंतीस) देवता प्रकट हुए- 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र, और दो अश्विनी कुमार। शत्रुओं को ताप देने वाले श्री राम ! ये ही तैंतीस देवता हैं। 

तात ! दिति ने दैत्य नाम से प्रसिद्ध यशस्वी पुत्रों को जन्म दिया। पूर्वकाल में वन और समुद्रों सहित सारी पृथ्वी उन्हीं के अधिकार में थी।

शत्रुदमन ! दनु ने अश्वग्रीव नामक पुत्र को उत्पन्न किया और कालका ने नरक और कालक नामक दो पुत्रों को जन्म दिया।

ताम्रा ने- क्रौंची, भासी, श्येनी, धृतराष्ट्री और शुकी नामक इन पांच विश्वविख्यात कन्याओं को उत्पन्न किया। इनमें से क्रौंची ने उन उल्लुओं को, भासी ने भास नामक पक्षियों को, श्येनी ने परम तेजस्वी से श्योनों (बाजों) और गिद्धों को तथा धृतराष्ट्री ने सब प्रकार के हंसो और कलहंसों नामक पक्षियों की जातियों को उत्पन्न किया। 

श्रीराम ! आपका कल्याण हो, उसी भामिनी धृतराष्ट्री ने चक्रवाक नामक पक्षियों को भी उत्पन्न किया था । ताम्रा की सबसे छोटी पुत्री शुकी ने नता नाम वाली कन्या को जन्म दिया। नता से विनता नाम वाली पुत्री उत्पन्न हुई। 

श्रीराम ! क्रोधवशा ने अपने पेट से 10 कन्याओं को जन्म दिया, जिनके नाम हैं- मृगी, मृगमंदा, हरी, भद्रमदा, मातंगी, शार्दुली, श्वेता, सुरभी, सर्वलक्षणसंपन्ना, सुरसा और कद्रुका। 

श्रीराम ! मृगी की संतान सारे मृग हैं और मृगमन्दा के ऋक्षसृमर और चमर। भद्रमदा ने इरावती नामक कन्या को जन्म दिया, जिसका पुत्र है ऐरावत नामक महान गजराज, जो समस्त लोगों का अभीष्ट है, वह श्राप के कारण समुंद्र में चला गया, फिर समुंद्र मंथन के समय निकला। 

हरी की संतानें हरि (सिंह) तथा तपस्वी (विचारशील) वानर तथा लंगूर हुए। क्रोधवशा की पुत्री शार्दूली ने व्याघ्र नामक पुत्र उत्पन्न किए। 

नरश्रेष्ठ ! मातङ्गी की संताने मातङ्ग (हाथी) हैं। श्वेता ने अपने पुत्र के रूप में एक दिग्गज को जन्म दिया। 

श्रीराम ! आपका भला हो, क्रोधवशा की पुत्री सुरभी देवी ने दो कन्या उत्पन्न की- रोहिणी और यशस्विनी गंधर्वी। रोहिणी ने गौओं को उत्पन्न किया और गंधर्वी ने घोड़ों को पुत्र रूप में प्रकट किया। 

श्रीराम ! सुरसा ने नागों को और कद्रू ने सर्पों के समस्त जातियों को उत्पन्न किया। 

नरश्रेष्ठ ! महात्मा कश्यप की पत्नी मनु ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र जाति वाले मनुष्यों को उत्पन्न किया। उनके मुख से ब्राह्मण उत्पन्न हुए। हृदय से क्षत्रिय तथा दोनों ऊरुओं से वैश्यों और दोनों पैरों से शूद्रों की जातियों का प्रदुर्भाव हुआ। 

कश्यप पत्नी अनला पवित्र फल वाले समस्त वृक्षों को उत्पन्न किया। कश्यप पत्नी ताम्रा की पुत्री जो शुकी थी, उसकी पौत्री विनता थी तथा कद्रू, सुरसा की बहन एवं क्रोधवशा की पुत्री कही गई है। इनमें में से कद्रू ने एक सहस्त्र नागों को भी उत्पन्न किया, जो इस पृथ्वी को धारण करने वाले हैं। 

विनता के दो पुत्र हुए- गरुण और अरुण। उन्हीं विनतानंदन अरुण से मैं (जटायु) तथा मेरे बड़े भाई संपाती उत्पन्न हुए। शत्रुदमन रघुवीर ! आप मेरा नाम जटायु समझें।"

यही है सृष्टी में जीवों की उत्पत्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण। सृष्टी में जीवों की प्रारम्भिक उत्पत्ति मैथुनी विधि से नहीं हुई, बल्कि तपस्वियों ने भिन्न-भिन्न जीवों साक्षात प्रकट किया।

अगर आपको मन में कोई संदेह हो तो आप अपने संदेह को नीचे कमेंट करके हमें अवश्य बताएं !


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