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भूत-प्रेत से मुक्ति का अचूक उपाय, दैवीय पीड़ा निवारण का उपाय, दुश्मन अब नहीं कर पायेंगे परेशान

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भूत-प्रेत से मुक्ति का अचूक उपाय

क्या आप वास्तव में भूत प्रेत या दैवीय पीड़ा  से परेशान हैं ? यदि आप परेशान हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। यदि आप मेरे द्वारा बताए गए इस लेख में नियमों का पालन करेंगे तो, मैं 99% गारंटी देता हूं कि, आप भूत प्रेतों से होने वाले दुःखों से मुक्ति पा जाएंगे और सुख पूर्वक अपना जीवन बिता सकेंगे।

भूत-प्रेत से मुक्ति का अचूक उपाय, दैवीय पीड़ा निवारण का उपाय, दुश्मन अब नहीं कर पायेंगे परेशान


दुख तीन प्रकार के होते हैं-  दैहिक, भौतिक और दैविक। 

दैहिक और भौतिक पीड़ा का निवारण तो आसानी से हो जाता है, लेकिन दैविक पीड़ा से पीड़ित व्यक्ति यह समझ नहीं पाता कि मेरे दुखों का अंत कैसे होगा और कब होगा और इस पीड़ा के निवारण के चक्कर में वह व्यक्ति अनेक कुकर्म भी कर देता है और उसका दुख घटने की बजाय बढ़ता ही चला जाता है। जैसे कि गलत और ढोंगी लोग के चक्कर में पड़कर वह अनावश्यक बलि इत्यादि कर्म कर देता है तथा बहुत ही ऐसे गलत कर्म है जो उसे दैवीय पीड़ा से छुटकारा नहीं दे सकते, फिर भी वह आडंबर में पड़कर अनेक गलत कर्म कर देता है, जिससे कि उसका दुख घटने की बजाय बढ़ता ही चला जाता है।

कुछ लोग अपने दुश्मनों से परेशान रहते हैं क्योंकि उनके दुश्मन उनके ऊपर तांत्रिक षट्कर्म (मुठकरणी, मेलान आदि) करवाते हैं, जिससे  उन्हें बहुत पीड़ा होती है तथा कुछ मामलों में तो कितने लोगों की जान भी चली जाती है, और कुछ लोग पागल होकर घूमते हैं, तो कितनी की जिन्दगी ही दुख भोगते भोगते बर्बाद हो जाती है, और यह सदैव सत्य है।

चूंकि समाज में गलत कर्म करने वाले भी सुखी हैं और सही कर्म करने वाले भी सुखी हैं; तथा गलत कर्म करने वाले भी दुखी हैं और सही कर्म करने वाले भी दुखी है। अतः सुख-दुख का निर्णय पूर्व जन्म में किए गए कर्मों के आधार पर होता है। इसके लिए आप हमारे इन लेख को पढ़ सकते हैं-

👉 दुख क्यों मिलता है ? सुख कैसे मिलेगा, कर्म का फल कैसे मिलता है ? दुखों से छुटकारा पाने का उपाय।

👉 कर्म सिद्धांत, कर्म किसे कहते हैं ? कर्म क्या है, कार्य करने का सही तरीका


अगर आप दैवीय पीड़ा से दुखी हैं और सुखी होना चाहते हैं, तो आपको मेरी कुछ शर्त माननी पड़ेगी ! क्योंकि यदि  आप कोई गलती नहीं करते हैं और अपनी तरफ से सदैव सतर्क हैं, तो ना ही आपको कोई दुश्मन परेशान कर सकता है और ना ही आपको कोई देवी-देवता अनावश्यक परेशान कर सकता है। 

शर्त इस प्रकार है-

1. आपको और आपके पूरे परिवार को शाकाहारी रहना पड़ेगा। 

2. आपको और आपके पूरे परिवार को सदाचारी रहना पड़ेगा। 

3. जानबूझकर किसी को कष्ट न देना।

4. किसी भी देवी देवता को कभी भी और किसी भी प्रकार से पशु - पक्षी या नर बलि आदि ना देना। अर्थात् अपने स्वार्थ के लिए तामसी कर्म को कभी भी ना करना।

कार्य इस प्रकार है-

1. सबसे पहले आप 7 दिन तक श्री महाविद्या का पाठ कराएं। इसकी भी एक शर्त है कि, पाठ करने वाले पुरोहित या ब्राह्मण अच्छा, तपस्वी और सदाचारी व शाकाहारी होना चाहिए। 

पाठकर्ता ब्राह्मण झप्सट या ढोंगी नहीं होना चाहिए। पाठ का उच्चारण बिल्कुल सही और शुद्ध होना चाहिए। श्री महाविद्या के पाठ से आपका 80% दुख समाप्त हो जाएगा, चाहे वह किसी भी प्रकार की दैवीय पीड़ा क्यों ना हो;  चाहे आपको कोई दुश्मन परेशान कर रहा हो या आपको कोई अनावश्यक रूप से देवी देवता परेशान कर रहा हो। 

2. अब बारी आती है, आपके घर में अकाल मृत्यु वाले प्रेत आत्माओं की। चूंकि सभी लोगों के घर में मृत्यु और अकाल मृत्यु अर्थात् समय से पहले ही मृत्यु हुई होती है और उन्हीं प्रेत आत्माओं से विशेष दुख मिलता है। जब आप 7 दिन तक श्री महाविद्या का पाठ करा देंगे तो, आपके घर के प्रेत आत्माओं को शांति मिल जाएगी। तब आप उन्हें बैठा पाएंगे और उनके मुक्ति का मार्ग बना पाएंगे अन्यथा आप उनकी मुक्ति का मार्ग नहीं बना पाएंगे।

अतः आपके घर, परिवार या वंश / खंदान में जिनकी भी अकाल मृत्यु हुई है, उनकी मुक्ति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध या गया में पिंडदान या नारायण बलि आदि कर्म करा करके उस अकाल मृत्यु व्यक्ति की मुक्ति का मार्ग बनाएं। तभी आप सुखी हो पाएंगे, अन्यथा नहीं।  त्रिपिंडी श्राद्ध या गया में पिंडदान या नारायण बलि आदि कर्म भी नियम पूर्वक होना चाहिये।

3. कुछ लोगों की दैवीय पीड़ा कुछ प्रबल होती है, जैसे कि किसी पर कोई दुश्मन तांत्रिक कर्म बान चलाना / मुठकरणी आदि कर रहा है या बहुत ही तीव्र गलत नक्षत्र योग परेशान कर रहा है, तो इसलिए श्री महाविद्या का पाठ पूरी तरह से लाभ नहीं पहुंचा पाता। उसके लिए आप अपने घर पर किसी जानकार और अच्छे ब्राह्मण से 5 दिन या 7 दिन का श्री महा विपरीत प्रत्यंगिरा का पाठ कराएं। इसका पाठ भी बिल्कुल सही और उच्चारण बिल्कुल शुद्ध होना चाहिए तथा पाठ करने वाला पुरोहित / ब्राह्मण अच्छा, तपस्वी, सदाचारी और विद्वान होना चाहिए, ताकि पाठ का असर हो सके। पाठ के संपूर्ण नियमों का पालन भी होना चाहिए। 

श्री महा विपरीत प्रत्यंगिरा

यह ध्यान रखिए कि, यदि आप निर्दोष है, तो संसार की कोई भी ताकत आपको परेशान नहीं कर सकती; और यह भी याद रखिए की समस्त दैवीय बाधाओं और समस्त दुखों से मुक्ति या छुटकारा दिलाने में श्री महा विपरीत प्रत्यंगिरा अनुष्ठान से बड़ा कोई अनुष्ठान नहीं है और श्री महा विपरीत प्रत्यंगिरा माता से बड़ा कोई देवी-देवता नहीं है, क्योंकि यह स्वयं महादेव जी ने कहा है।

चूंकि एक सच्चा ब्राह्मण इन अनुष्ठानों को करने में अधिक पैसा नहीं लेता और फिर भी यदि आप आर्थिक रूप से कमजोर हैं लेकिन यदि आप में भक्ति और शुद्धता है, यदि आप इन अनुष्ठान के संपूर्ण नियमों का पालन कर सकते हैं, तो आप स्वयं सुबह और शाम इन अनुष्ठानों का पाठ कर सकते हैं और आपको कुछ ही दिनों में दुखों से छुटकारा मिलने लगेगा और दुखों से आप छूट जाएंगे। इन अनुष्ठानों को कैसे करना है, इनका नियम क्या है ? आप इन अनुष्ठान की पुस्तकों को अच्छी तरह से पढ़ लें और विद्वान ब्राह्मण से जाकर और नियमों की जानकारी लेकर आप स्वयं इन अनुष्ठान को कर सकते हैं।

यदि आप इन कर्मों को समय-समय पर कराते हैं, जैसे कि वर्ष में एक बार करा लेंगे, तो बहुत दिनों तक आप सब सुखी रहेंगे। और यदि आप फिर कोई गलती नहीं करते हैं तो आप सदैव सुखी रहेंगे। लेकिन प्रभु की भक्ति समझकर आप अपने घर में मां श्री महा विपरीत प्रत्यंगिरा या श्री महाविद्या का अनुष्ठान अवश्य कराएं, तो ग्रह बाधा, प्रेत बाधा, समस्त दुख, मुठकरणी, बांझपन, अकाल मृत्यु, व्यापार में घाटा आदि सभी दोष दूर हो जाएंगे।


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