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Makar Sankranti ka rahasy : मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ने के बजाय 15 जनवरी को क्यों पड़ती है ?

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 मकर संक्रांति से सम्बंधित एक अनोखा रहस्य, जिसे कोई भी नहीं बताता चाहे वह कोई भी क्यों न हो:-

मेरे प्रिय दोस्तों ! जैसा कि आप जानते होंगे कि सन् 2000 के पहले तक मकर संक्रांति प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को पड़ती थी, लेकिन सन् 2000 से मकर संक्रांति वास्तव में 15 जनवरी को पड़ने लगी। इसका कारण क्या है ? यदि आप जानना चाहते हैं तो कृपया आप मेरे इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ें-  

मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ने के बजाय 15 जनवरी को अब क्यों पड़ती है ? 

Makar Sankranti ka rahasy

इसका कारण जानिए-  अंग्रेजी तारीख के निर्माण करने वालों ने यह नियम बनाया की हर  400 साल पर फरवरी 30 दिन की होगी, लेकिन वैज्ञानिकों ने अपने कंप्यूटर प्रोग्राम में भूल बस 29 तारीख के फरवरी के हिसाब से ही कम्प्यूटर में सभी प्रोग्राम लोड कर दिये थे। वह जानबूझकर के भी फरवरी को 30 तारीख का नहीं बना पाए, इसलिए अंग्रेजी तारीख 1 दिन आगे -आगे चलने लगी। इसी कारण से जो तारीख आज 15 दिख रही है, वह वास्तव में 14 ही है। इसी कारण से मकर संक्रांति 14 तारीख के बजाय 15 जनवरी को पड़ती है।

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मकर संक्रांति, यानी सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने का संक्रमण काल। भारत में प्रचलित सभी हिंदू त्यौहार चंद्रमा पर आधारित हैं, यही वजह है कि हिंदू त्यौहारों की अंग्रेज़ी तारीख़ बदलती रहती है।

इस समय जो कैलेंडर इस्तेमाल होता है, वह ग्रेगोरियन या अंग्रेजी  कैलेंडर है। यही वजह है कि चंद्रमा की स्थिति में मामूली हेरफेर की वजह से यह कभी 14 जनवरी को होता है, तो कभी 15 को, लेकिन सूर्य की मुख्य भूमिका होने की वजह से अंग्रेज़ी तारीख़ नहीं बदलती।

यह प्रमाण सन् 2000 में न्यूज़ पेपर में प्रकाशित हुआ था।

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