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हमारे सभी स्नान पर्व जाड़े में ही क्यों पड़ते हैं ?

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हमारे हिंदू धर्म के अनेक स्नान पर्व जाड़े में ही क्यों पड़ते हैं ?

प्रिय मित्रों ! जैसा कि मुझे पता है, आपके दिमाग में कभी ना कभी अवश्य आया होगा कि हिंदू धर्म में पड़ने वाले अक्सर स्नान पर्व सर्दियों के मौसम में या जाड़े के मौसम में ही क्यों पड़ते हैं ? 

 जिन लोगों को प्रतिदिन स्नान करने की आदत नहीं होती है, वे लोग जब किसी पर्व पर स्नान करने के लिए मजबूर होते हैं तो यह प्रश्न उठाते हैं कि ये स्नान पर्व जाड़े में ही क्यों पड़ गए ? 

हमारे सभी स्नान पर्व जाड़े में ही क्यों पड़ते हैं ?


 जाड़े में स्नान करने पर, प्रतिदिन स्नान न करने वाले लोगों को तकलीफ होती है और यदि वे जाड़े के मौसम में स्नान  करने के लिए किसी नदी या पवित्र स्थलों पर जाते हैं जैसे हरिद्वार, अयोध्या या काशी इत्यादि ; तो जब वे नदी में स्नान करने के लिए प्रवेश करते हैं, तो मालूम पड़ता है कि ठण्डे जल के कारण उनका शरीर ही कट कर गिर जाएगा। इसलिए वे जाड़े में स्नान करने के बारे में प्रश्न उठाते हैं, कि यह हमारे हिंदू धर्म के स्नान पर्व जाड़े के मौसम में क्यों पड़ गए ?

तो इसमें विद्वानों ने अपने-अपने मत दिए हैं, जिसमें क्या बताया गया है, आप इस लेख में पूरा पढ़ लीजिए-

हमारे सभी स्नान पर्व जाड़े में ही क्यों पड़ते हैं ? इसका कारण जानिए -

चूंकि हिंदू धर्म के सभी स्नान पर्व बहुत ही पुण्य दाई होते हैं और पापों का नाश करते हैं तथा उत्तम पद प्राप्त कराते हैं। जैसे हमें इस संसार में उच्चतम पद प्राप्त करने के लिए कठिन परीक्षा देनी पड़ती है, उसी प्रकार यह जाड़े के स्नान पर्व भी एक परीक्षा के ही समान हैं। जो इस परीक्षा में पास होगा, वही उत्तम पुण्य प्राप्त करेगा और अपने पापों का नाश करेगा। इसी कारण हमारे हिंदू धर्म के अनेक स्नान पर्व जाड़े में ही पड़ते हैं।

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