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Reasons of unemployment, बेरोजगारी क्या है, बेरोजगारी का असली कारण, बेरोजगारी कैसे समाप्त होगी ?

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भारत में बेरोजगारी की समस्या  ( Unemployment in India ) :-

 इस लेख में शामिल है - भारत में बेरोजगारी की समस्या,   लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमी,  बेरोजगारी का असली अर्थ,  बेरोजगारी का बुरा प्रभाव,   बेरोजगारी का कारण -  1. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली,  2. खराब होती जा रही मानसिकता,  3. पदासीन अधिकारियों द्वारा अपने पदों का गलत फायदा उठाना,  4. औद्योगीकरण की मंद प्रक्रिया,  5. कृषि का पिछड़ापन,  6. नौकरियों व सरकारी भर्तियों में धांधली,   7. वोट बैंक या चुनावी मुद्दा बनाने के लिए सरकारी भर्तियों को रोकना,   8. सरकारी पदों पर विद्यमान लोगों को अधिक वेतन,  9. निजी उद्योग धंधों की कमी,  बेरोजगारी दूर करने के उपाय -   1. शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन,  2. कुटीर व निजी उद्योगों का विकास,  3. राष्ट्र निर्माण संबंधी विविध कार्य,  Conclusion 

प्रिय मित्रों ! आज के इस लेख में हम बेरोजगारी के बारे में पूर्ण रूप से बताएंगे तथा यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि बेरोजगारी क्या है ? बेरोजगारी क्यों होती है, और बेरोजगारी कैसे समाप्त हो सकती है ! तो आप इसके लिए इस लेख को पूरा पढ़िए-

बेरोजगारी क्या है


भूमिका

शायद आप जानते होंगे कि अनेक बच्चे अच्छी - अच्छी डिग्रियाँ लेकर रोजगार की तलाश में भटकते हैं। कभी-कभी रोजगार की तलाश में भटकता हुआ युवक अपनी डिग्रियों को फालतू समझने के लिए विवश दिखाई देता है। वह रोजगार की तलाश में दिन - रात देर तक बैठकर समाचार पत्रों के विज्ञापनों को पड़ता है। अधिक उम्र तक लोग अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरियाँ खोजते रहते हैं। घर के लोग उसे निकम्मा समझते हैं और समाज के लोग उसे आवारा समझते हैं। नौकरी न मिलने पर वे लोग निराशा की नींद सोते हैं और आंसुओं के खारे पानी को पी - पीकर समाज को अपनी मौन व्यथा का सुनाते हैं।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमी -  यदि नैतिक शिक्षा के अभाव में जनता भ्रष्ट, स्वार्थी और खराब मानसिकता वाली हो जाए, तो भ्रष्ट जनता छोटे स्तर (ग्राम प्रधान) से लेकर बढ़े स्तर (विधायक व सांसद) तक भ्रष्ट उम्मीदवार को ही चुनाव में जितायेगी और इस तरह दिन प्रति दिन भ्रष्टाचार बढ़ता ही जाएगा और भ्रष्ट लोग ही शासन करेंगे।

अतः शिक्षा के छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किया जाए।

बेरोजगारी का असली अर्थ (True meaning of Unemployment)

बेरोजगारी उस स्थिति को कहते हैं या बेरोजगार वह व्यक्ति होता है, जब वह व्यक्ति प्रचलित मजदूरी की दरों पर अपने योग्य कार्य करने के लिए तैयार हो और उसे कोई काम ना मिलता हो।

बालक, वृद्ध, रोगी, अक्षम एवं अपंग व्यक्तियों को बेरोजगारों की श्रेणी में नहीं रखा जाता हैं। जो व्यक्ति काम करने के इच्छुक नहीं है या परजीवी है, वे लोग बेरोजगारों की श्रेणी में नहीं आते हैं।

लेकिन भारत में "बेरोजगार व्यक्ति" लोग उसे कह रहे हैं, जिसे सरकारी नौकरी न मिले, परन्तु यह गलत है। 

बेरोजगारी : प्रमुख समस्या

किसी भी देश की आर्थिक समस्याओं के अंतर्गत बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसके कारण केवल मानव शक्ति ही प्रभावित नहीं होती वरन् उस देश का आर्थिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

बेरोजगारी का बुरा प्रभाव

 जो व्यक्ति अपने कार्य द्वारा देश के आर्थिक विकास में सक्रिय सहयोग दे सकते हैं, वह कार्य के अभाव में बेरोजगार रह जाते हैं और यह स्थिति उस देश के विकास में बाधक हो जाती है।

बेरोजगारी किसी भी देश या समाज के लिए एक ऐसा अभिशाप है, जिससे एक ओर निर्धनता व भुखमरी तथा मानसिक अशांति फैलती है, तो दूसरी ओर युवाओं में आक्रोश तथा अनुशासनहीनता बढ़ती है। चोरी, डकैती, हिंसा, अपराध एवं आत्महत्या जैसी समस्याओं के लिए एक बड़ी सीमा तक बेरोजगारी ही जिम्मेदार है। बेरोजगारी एक ऐसी भयंकर स्थिति है, जो संपूर्ण देश के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन को नुकसान पहुंचाती है।

बेरोजगारी का कारण (Cause of Unemployment)

भारत में बेरोजगारी के अनेक कारण हैं, जिनमें कुछ प्रमुख कारण निम्न हैं-

1. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली :-

संविधान के नियमानुसार, भारत की साक्षरता दर को अधिक दिखाने के लिए, स्कूल में दाखिल प्रत्येक बच्चे को कक्षा 8वीं तक पास (उत्तीर्ण) कर देना ही बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है।

अधिकांश बच्चे व बच्चों के अभिभावक चाहते हैं कि जब exam हो तो, exam में कुछ नकल हो जाए। अत: exam में नकल कराने के लिए वे लोग स्कूल नकल माफियों को मुंह मांगा पैसे देते हैं। इसका असर यह होता है कि अधिक संख्या में पढ़ाई में अधिक कमजोर व तेज सभी बच्चे पास (उत्तीर्ण) हो जाते हैं और बच्चों की भारी भीड़ लगती जा रही है। धांधली करके पास कमजोर बच्चे भी सरकारी पदों की इच्छा रखते हुए सरकारी पदों की भर्तियों पर भारी भीड़ बनाए हुए हैं।

चूंकि भारतीय शिक्षा सैद्धांतिक अधिक है और इसमें व्यवहारिकता की कमी है। इसमें पुस्तकीय ज्ञान पर ही विशेष ध्यान दिया जाता हैं। इसी कारण यहाँ के विद्यालयों से निकलने वाले छात्र दफ्तर के लिपिक ही बन पाते हैं। अधिकांश बच्चे निजी उद्योग धंधे स्थापित करने योग्य नहीं बन पाते हैं।

2. खराब होती जा रही मानसिकता:-

इस वर्तमान युग में विद्यालयों में नैतिक शिक्षा न पढ़ाये जाने से लगभग 80% छात्र - छात्राएँ बुरी और स्वार्थ-पन मानसिकता से ग्रसित होते जा रहे हैं, जिसका असर डायरेक्ट पूरे समाज की व्यवस्था पर पड़ रहा है। बच्चे बिना परिश्रम किए ही परीक्षाओं में पास हो जाना चाहते हैं, इसलिए ऐसे विद्यालयों व कालेजों में नाम लिखवाते हैं या एडमिशन करवाते हैं, जिस विद्यालयों या कालेजों में नकल होती है, और छात्र - छात्राएं नकल करवाने के लिए या परीक्षाओं में धांधली करवाने के लिए कालेज नकल माफियाओं को मुंह मांगा पैसा देते हैं और अधिक से अधिक नम्बर या अंक भी प्राप्त करते हैं, और 99% छात्र - छात्राएँ इसका विरोध नहीं करते।

कक्षा 10वीं से ही विद्यार्थीगण नकल करके भारी मात्रा में पास हो जाते हैं और इसका असर यह होता है कि प्रत्येक सरकारी नौकरी पर डिग्रीधारक बच्चों की भारी भीड़ जमा होती जा रही है।

3. पदासीन अधिकारियों द्वारा अपने पदों का गलत फायदा उठाना:-

आज प्रत्येक क्षेत्र में तीव्र भ्रष्टाचार व्याप्त है। इसका कारण यह है कि हर क्षेत्र में अधिकांश अधिकारीगण नैतिक शिक्षा विहीन और स्वार्थी हैं। अधिकांश अधिकारियों को अच्छे कर्तव्य और अकर्तव्य का भी ज्ञान नहीं होता है। आज किसी भी क्षेत्र में भ्रष्ट और स्वार्थी अधिकारियों की कमी नहीं है। ऊपर से लेकर नीचे तक, सभी दौलत के भूखे हो गये हैं। पैसा दो और पेपर (exam) में आंख मूंदकर बैठे बैठे पास हो जाओ, पैसा दो और सैनिक मेडिकल टेस्ट में पास हो जाओ, पैसा दो और exam से पहले ही मेडिकल या इंजिनियरिंग कालेज की सीट बुक, पैसा दो और इंटरव्यू में पास हो जाओ। ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकांश अधिकारी व नेतागण केवल दौलत के भूखे हैं। 

मैं DM या DGP या Doctor या MLA, विधायक या फला लेखपाल या फला अधिकारी या फला नेता हूॅं, यह मेरा आदमी है, पहले इनको नौकरी मिलनी चाहिये या इसे इन्टरव्यू में पास कर देना या exam में इस लड़के या लड़कियों को पास कर देना, जितना पैसे चाहिये ले लो। 

यह एक कड़वा सत्य है और इस भ्रष्टाचार का शिकार मेहनत से पढ़ने - लिखने वाले छात्र - छात्राएँ व मन लगाकर पढ़ने वाले गरीब बच्चे हो जाते हैं।

4. औद्योगीकरण की मंद प्रक्रिया:-

भारत के अधिकांश राज्य, जहां बेरोजगारों की संख्या अधिक है, वहां पर उद्योग - धंधे बहुत कम स्थापित हैं। औद्योगीकरण की प्रक्रिया में कमी भी बेरोजगारी का महान कारण है।

5. कृषि का पिछड़ापन:-

भारत की लगभग 70% जनता कृषि पर निर्भर है। कृषि के क्षेत्र में अत्यंत पिछड़ी हुए दशा के कारण कृषि बेरोजगारी व्यापक हो गई है। भारत के अधिकांश राज्यों में लोग कृषि को व्यवसाय न समझकर और आधुनिक व सुव्यवस्थित ढंग से न करके केवल पेट भरने के उद्देश्य से करते हैं।

6. नौकरियों व सरकारी भर्तियों में धांधली:-

आजकल सरकारी पदों की भर्तियों में धांधली एक आम बात हो गयी है। अपने लोगों को रखवाने के लिए और वोट बैंक बनाने के लिए छोटे से लेकर बड़े स्तर तक धांधली हो रही हैं, जिसमें शामिल हैं - अनेक मंत्री, सांसद, विधायक, डीएम, एसडीएम, डाक्टर, भ्रष्ट व अपने पदों का गलत फायदा उठाने वाले अधिकारी गण। 

धांधली या नौकरियों व भर्तियों में भ्रष्टाचार का असर यह होता है कि, कठिन परिश्रम के बावजूद योग्य बच्चों को नौकरी नहीं मिलती।

7. वोट बैंक या चुनावी मुद्दा बनाने के लिए सरकारी भर्तियों को रोकना:-

आजकल ऐसा देखने में आ रहा कि, वोट बैंक या चुनावी मुद्दा बनाने के लिए सरकारी भर्तियों को समय - समय पर न कराकर, उसे रोके रखा जा रहा है। 

जरा सोचिए - कोई लड़का पुलिस में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा है, और उसे पुलिस भर्ती में ओवरऐज होने में सिर्फ दो वर्ष बचा हो और पुलिस की भर्ती दो साल तक आवे ही न, तब, अब तो उस लड़के को पुलिस की नौकरी नहीं मिल सकती।

और इसी प्रकार अनेक पदों पर भर्तियों को वोट बैंक या चुनावी मुद्दा बनाकर कई कई वर्षों तक रोक दिया जाता है।

8. सरकारी पदों पर विद्यमान लोगों को अधिक वेतन:-

इस भारतवर्ष में कई लाख सरकारी पद खाली हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर नहीं भरा जाता क्योंकि उन्हें वेतन नहीं दिया जा सकेगा।

वर्तमान में मोटे तौर पर;   सरकारी अध्यापकों का वेतन- 45 हजार से 2.5 लाख / महीना, सरकारी डाक्टरों का वेतन - 80 हजार से 2.5 लाख / महीना,

इसी प्रकार से लेखपाल, पुलिस, इन्जीनियर्स, सेना, व अन्य सभी सरकारी पदों पर आरूढ़ लोगों को वेतन मिलता है। 

अरे, इतना अधिक वेतन देने की क्या आवश्यकता है ? अगर इन्हें थोड़ा कम वेतन ( औसत मान लेते हैं  35 हजार से 45 हजार / महीना )  दिया जाता, और उस बचे पैसे में अन्य लोगों को भी नौकरी दी जाती, तो क्या ये लोग भूखों मर जाते ?

लेकिन कोई भी सरकार ऐसा नहीं करेगी। सरकार, सरकारी पदों पर कम लोगों को ही रखेगी और उन्हें अधिक से अधिक वेतन देगी तथा दिखाएगी कि देखो, भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि प्रति व्यक्ति मासिक आय इतने लाख रूपये है। चाहे अधिकांश जनता बेरोजगार हो या भाड में जाए।

मैं दिल से कहता हूॅं कि, अधिक वेतन देना भी बेरोजगारी का बड़ा कारण है।

9. निजी उद्योग धंधों की कमी:-

जिनके पास अधिक पैसा है, वे लोग भी अपना निजी व्यवसाय न करके सरकारी नौकरी के चक्कर में फॅंसे रहते हैं। यह भी बेरोजगारी का कारण है।

इसके अतिरिक्त मानसून की अनियमितता, अधिक संख्या में शरणार्थियों का आना, मशीनीकरण के कारण होने वाली श्रमिकों की कमी से ही बेरोजगारी की भंयकर स्थिति उत्पन्न हुई है। अत: देश को बेरोजगारी से उभारने के लिए समुचित समाधान नितांत आवश्यक है।

जनसंख्या वृद्धि को मैं कोई महत्व नहीं देता।

बेरोजगारी दूर करने के उपाय 

सबसे पहले बेरोजगारी के उपरोक्त कारणों को दूर करें। बेरोजगारी को दूर करने में निम्नलिखित उपाय सहायक सिद्ध हो सकते हैं-

1. शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन:-

कक्षा 1वीं से ही बच्चों को परीक्षा में पास (उत्तीर्ण) होना अनिवार्य किया जाए, और जब तक बच्चा एक कक्षा को अपनी मेहनत से और सुचारु रूप से उत्तीर्ण न कर ले, तब तक उसे अगली कक्षा में प्रवेश न दिया जाए।

परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की और थोड़ी सी भी धांधली न की जाए। 

कक्षा 12वीं तक नैतिक शिक्षा को कड़ाई से अनिवार्य किया जाए और उसकी कठिन परीक्षा करायी जाए, जिसमें बच्चों को पास (उत्तीर्ण) होना अनिवार्य हो, जिससे कि बच्चों में खराब या गलत या स्वार्थपन वाली मानसिकता समाप्त हो जाए और बच्चे गलत रास्तों को छोड़कर अच्छे मार्ग का अनुसरण करें। 

बच्चों को अनेक क्षेत्रों में अनेक प्रकार के निजी उद्योगों का भी ज्ञान दिया जाए।

ऐसी शिक्षा प्रणाली लागू करने से, केवल दिमागदार व मेहनती बच्चे ही सरकारी नौकरी की इच्छा रखेंगे और पायेंगे तथा पढ़ाई में कमजोर बच्चे अपनी योग्यता के अनुसार कार्य करेंगे।

2. कुटीर व निजी उद्योगों का विकास:-

सरकार द्वारा अधिकाधिक मात्रा में कुटीर उद्योगों की स्थापना करानी चाहिए। 

देश में व्यापक स्तर पर औद्योगिकरण किया जाना चाहिए। इसके लिए विशाल उद्योगों के साथ साथ लघुस्तरीय उद्योगों का भी अधिक विकास करना चाहिए।

कृषि के क्षेत्र में अधिकाधिक व्यक्तियों को रोजगार देने के लिए सहकारी खेती को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए

मुख्य उद्योगों के साथ-साथ सहायक उद्योगों का भी विकास किया जाना चाहिए।

धनवान व्यक्ति स्वयं अपना उद्योग स्थापित करें और उसमें अन्य बेरोजगार व्यक्तियों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार दें।

3. राष्ट्र निर्माण संबंधी विविध कार्य:-

देश में श्रमिकों की बेरोजगारी को दूर करने के लिए राष्ट्र निर्माण संबंधी विविध कार्यों का विस्तार किया जाना चाहिए, जिससे कि श्रमिकों को लगातार नया - नया काम मिलता रहे। जैसे सड़कों का निर्माण, रेल परिवहन का विकास, पुल निर्माण, बांध निर्माण तथा वृक्षारोपण आदि।

Conclusion :-

प्रिय पाठक गण ! आज के समय में बेरोजगारी की समस्या बहुत गम्भीर समस्याओं में से एक है। लोग बेरोजगारी का अर्थ सरकारी नौकरी न मिलने से लगा रहे है, और जिसके पास धन बल और बुद्धि बल है, वह भी यदि सरकारी नौकरी के चक्कर में अपना अमूल्य समय गवाए , और नारा लगाए कि मैं बेरोजगार हूॅं, तो यह गलत है।

चूंकि उत्तर प्रदेश में सभी बोर्डों को मिलाकर प्रति वर्ष लगभग 60 लाख बच्चे 12वीं को पास कर रहे हैं। अत: चाहकर भी कोई भी सरकार प्रति वर्ष इन बच्चों का 25% भी बच्चों को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती।

हमने ऊपर बेरोजगारी के जो कारण बताये हैं, यदि उन कारणों को दूर कर दिया जाए तो हमारा विश्वास है कि बेरोजगारी 90% तक समाप्त हो जाएगी।

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