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Special care of bones and joints : Osteomalacia, हड्डियों और जोड़ों में दर्द का इलाज

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हड्डियों और जोड़ों की विशेष देखभाल :-

वैसे तो सर्दियों में बड़ी संख्या में लोग हड्डियों व जोड़ों के दर्द की समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं। इसका कारण यह होता है कि तापमान में कमी के कारण नसें कुछ सिकुड़ने लगती हैं और vitamin D की कमी के कारण हड्डियों और जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है और हड्डियों में लचीलापन की कमी हो जाती है। इस कारण जोड़ों में अकड़न भी आ जाती है। इसलिए सर्दियों में लोगों को अपने जोड़ों और हड्डियों में दर्द का खास ध्यान रखना चाहिए।

महापुरुषों का कथन है- शुद्ध और सात्विक अन्न से शुद्ध मन का विकास होता है और शुद्ध मन से शुद्ध जीवन तथा शुद्ध स्मृति विकसित होती है।

आधुनिक जीवन में वैसे तो जोड़ों के दर्द के लिए व्यक्ति के उम्र की सीमा की कोई उपयोगिता नहीं रह गई। परन्तु जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है ,अस्थियों में वजन सहने की शक्ति कम हो जाती है और जोड़ों के सायनोवियल  तरल कम होने लगते हैं। हड्डियों में कैल्शियम तथा अन्य पदार्थ दूषित रूप में जमा होने लगते हैं। कार्टिलेज पर उम्र का प्रभाव पड़ने से उनकी कार्य क्षमता में बाधा पैदा हो जाती है और जोड़ भी कमजोर होने लगते हैं। 

Osteomalacia


प्रायः ऐसी अवस्था अधिकतर उन लोगों की होती है जिनका वजन ज्यादा होता है। कमजोर जोड़ शरीर का भार वहन नहीं कर सकने के कारण या तो मुड़ जाते हैं या उनकी गतिशीलता ही प्रभावित हो जाती है, जिसे
"स्टफ ज्वाइंट" का नाम दिया जाता है।

 कैल्शियम के बारीक कणों को उपास्थि (कार्टिलेज) आकर्षित करने की क्षमता रखती है, जिसके कारण इसमें कड़ापन आ जाता है। जोड़ो में तैलीय पदार्थ (सायनोवियल फ्लुएड) भी कम होने लगता है। चूंकि यही पदार्थ जोड़ो को घर्षण से बचाता है, उनमें लचीलापन लाता है और इसी के द्वारा स्नेहन या चिकनाई होती है, जो अस्थियों को रगड़ व टूट-फूट और एक दूसरे के साथ सहयोग से गतिशील करने में सहायक होती हैं।

इस रोग में बड़े जोड़ों में भयानक दर्द होता है, विशेषकर घुटनों के जोड़ों व कमर में अधिक सूजन आ जाती है व दर्द होता हैऔर गंभीर अवस्था में शरीर के हर जोड़ और हड्डियों में दर्द होने लगता है। 

कुछ शोधकर्ता इस परिणाम पर पहुंचे हैं कि भोजन में परिवर्तन या फेर बदल करने से इस प्रकार के रोगों में कोई लाभ नहीं पहुंचता । परंतु इस धारणा के विपरीत अनेक विशेषज्ञ शोधकर्ता केवल भोजन प्रक्रिया में सुधार से ही लोगों में इस रोग पर काबू पाये हैं।

सन्तुलित आहार के द्वारा जोड़ों में दर्द का इलाज:- 

हड्डियों और जोड़ों में दर्द के इलाज के लिए महत्व तो दोनों बातों का है कि आप क्या खाते हैं जो आपको खाना नहीं चाहिए और आप क्या नहीं खाते जो आपको जरूरी खाना चाहिए ?

चूंकि पोषण से संबंधित कमियों को भोजन में उचित फेरबदल करके पूरा किया जा सकता है। 

1. हड्डियों और जोड़ों में दर्द के इलाज के लिए प्रधान पोषक तत्व है- आयोडीन, कैल्शियम, ताॅंबा, विटामिन डी, बी, ए और विटामिन सी।

2. यदि आपके आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का स्राव कम होता है तो आप जो भोजन ग्रहण करते हैं, उसमें से कैल्शियम का अवशोषण नहीं हो पाता और भोजन का कैल्शियम बिना अवशोषित हुए ही शरीर से बाहर निकल जाएगा , जिससे आपके शरीर में कैल्शियम का अभाव हो जाता है। कैल्शियम के अवशोषण के लिए शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए का होना भी जरूरी है।

3. विटामिन सी वात रोग से संबंधित रोगाणु कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम होता है। विटामिन E की रोजाना 600 I.U. के सेवन से अस्थियों के शोथ को रोका जा सकता है तथा यह रोग के उपचार में बहुत सहायक होता है। 

4. एड्रिनल ग्रंथि जब भली प्रकार से कार्य करना बंद कर देती है तो उससे निकलने वाले काॅर्टिसोन जैसे स्टेरॉयड हार्मोन्स के स्राव में अवरोध उत्पन्न हो जाता है। अस्थि शोथ में कमी करने के लिए एड्रिनल ग्रंथि की कार्यप्रणाली को सुचारु रुप से चालू करना होगा और इसके लिए भोजन एवं पौष्टिकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

5. इस रोग में थायराॅइड ग्रन्थि का सुचारु रूप से काम करना भी जरूरी है और इसके लिए शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन होना अनिवार्य है। 

6. विटामिन B3 अस्थिशोथ को ठीक करने में बहुत सहायक होती है।

7. हड्डियां कैल्शियम की अधिक मात्रा से बनी होती हैं लेकिन हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ कैल्शियम का सेवन ही काफी नहीं है, बल्कि विटामिन डी का सेवन भी आवश्यक होता है। विटामिन डी की कमी से हड्डियों में अकड़न आने लगती है और मांसपेशियों में कमजोरी होने लगती है। 

विटामिन ए, बी, सी की उपस्थिति से ही शरीर में विटामिन डी का अवशोषण हो पाता है और कैल्शियम का भी अवशोषण विटामिन ए की उपस्थिति से ही होता है। यदि इन समस्याओं से बचना है और हड्डियों को मजबूत बनाए रखना है तो विटामिन डी और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए।

मल्टीविटामिन भी कुछ हद तक फायदेमंद है पर इनका सेवन डॉक्टर के परामर्श से करें। 

जोड़ों के दर्द में सुबह की धूप से फायदे:-

शायद आप जानते ही होंगे कि जब हमारी त्वचा सूरज की किरणों के संपर्क में आती है तो शरीर विटामिन डी बनाता है। लेकिन सर्दियों में धूप के हल्के होने और ठंड से बचने के कारण लोग सदैव ऊनी कपड़े पहनना कहीं ज्यादा पसंद करते हैं। यदि आप सर्दियों की धूप में कुछ समय मालिश व व्यायाम नहीं करेंगे तो आपका शरीर विटामिन डी को ठीक से नहीं बना पायेगा। 

थोड़ी देर ही सही, धूप में बैठने से जोड़ों के दर्द से काफी राहत मिलती है। याद रखें ! सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी कुदरती होता है, जिसका कोई अन्य बेहतर विकल्प होता ही नहीं।

जोड़ों के दर्द में योगासन और व्यायाम के फायदे:-

योगासन व व्यायाम करने से हड्डियों को गर्माहट मिलती है और हड्डियां व मांसपेशियां लचीली भी रहती हैं, जिससे पैरों में अकड़न की समस्या भी नहीं होती। जो लोग सर्दियों में कुछ देर तक धूप में नहीं रहते या कम शारीरिक गतिविधियां करते हैं, उन्हें जोड़ों के दर्द की समस्या अधिक बढ़ जाती है। 

वैसे तो सुबह की सैर हर मौसम में सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन सर्दी के दिनों में कुछ खास फायदा देती है। लेकिन हां बुजुर्ग लोग सुबह-सुबह टहलने से बचें। नियम से टहलने से शरीर को गर्माहट मिलती है तथा हर मौसम से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाये रखने में सहायक है। 

टहलना या सुबह की सैर दूरी की मात्रा, मौसम तथा उम्र पर निर्भर करती है। अधिक ठंड पड़ने पर अच्छा है कि आप बाहर सैर करने के लिए मत निकलें।  

टहलने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक क्षमता भी बढ़ जाती है और तनाव दूर होता है। मध्यम ठंड के दिनों में प्रतिदिन कम से कम 3 किलोमीटर सैर करना आवश्यक होता है। इसके अलावा वजन उठाने वाली कसरत करना अथवा सीढ़ियां चढ़ना हर उम्र में हड्डियों को स्वस्थ रखने में लाभदायक होता है। इसके अलावा डांस भी एक बेहतरीन व्यायाम होता है। 

सर्दी के दौरान रक्त धमनियां संकुचित हो जाती हैं जिससे खून का प्रवाह सामान्य ढंग से नहीं हो पाता। शरीर के विभिन्न अंगों तक खून पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। अतः ऑक्सीजन की मात्रा कम होने पर शरीर की तंत्रिकाओं में तनाव पैदा हो जाता है जिससे हड्डियों में दर्द कम होने लगता है। ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए खुले और प्रदूषण रहित माहौल में रहें। 

सर्दियों में गर्म पानी से नहाए:-

 जोड़ों के दर्द से परेशान रहने वाले लोगों के लिए गर्म पानी से नहाने, गुनगुने पानी में पैरों को कुछ देर डाल कर रखने से जोड़ों का दर्द से राहत मिल जाती है। 

सर्दियों में खान-पान का ध्यान रखें:-

 हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए खान - पान के नियमों का पालन करना चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते रहे और जोड़ों में होने वाले दर्द और उन समस्याओं से छुटकारा मिल सके। आप दूध, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जियां और बादाम को  खाद्य पदार्थ के रूप में शामिल करके जरूरत पूरी कर सकते हैं।

Digital working करने वालों के लिए सुझाव:-

जो लोग कंप्यूटर पर काम करने के लिए लंबे समय तक बैठे रहते हैं उनके जोड़ों में दर्द होना सामान्य समस्या है और यह समस्या सर्दियों में बढ़ जाती है। एक ही जगह पर ज्यादा देर तक बैठने से हड्डियों में ठंड लगने के कारण अकड़न आ जाती है जिससे जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए थोड़ी थोड़ी देर पर उठ कर शरीर को स्ट्रेच करें और अपने पास हीटर इत्यादि का प्रयोग करें। लंबे समय तक एक ही पोस्चर में  न बैठें और गर्दन को अधिक झुका कर न बैठें। पैरों को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े, जूते इत्यादि का प्रयोग करें।

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