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Kartik Purnima: कार्तिक की पूर्णिमा का महत्व

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कार्तिक पूर्णिमा ( कार्तिकी ):-

प्रिय बन्धुओं! कार्तिक की पूर्णिमा का भी अपना विशेष महत्व है। कार्तिक की पूर्णिमा को कार्तिकी भी कहा जाता है। 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सायंकाल में भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इस कारण इस दिन होम, दान आदि का यज्ञों के समान का फल मिलता है।

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है,क्योंकि इस दिन भगवान शंकर ने त्रिपुर कहलाने वाले तीन असुरों का संहार किया था, जिसके बाद वह त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए हैं, इसलिए इस दिन को 'त्रिपुरारी  पूर्णिमा' भी माना जाता है।

कार्तिक की पूर्णिमा

यदि कार्तिक की पूर्णिमा के दिन कृतिका नक्षत्र हो तो कार्तिक की पूर्णिमा को "महाकार्तिकी"  कहा जाता है।

 यदि कार्तिक की पूर्णिमा के दिन भरणी अथवा रोहिणी नक्षत्र हो तो विशेष फल प्राप्त होता है।

यदि कार्तिक की पूर्णिमा के दिन कृतिका नक्षत्र पर चंद्रमा और बृहस्पति हो तो यह "महापूर्णिमा" का योग होता है, जिसका बहुत बड़ा महत्व होता है। 

कार्तिक की पूर्णिमा का महत्व:-

1. कार्तिक की पूर्णिमा को ब्रह्मा, विष्णु, शिव, आदित्य, अंगिरा व अनेक ऋषि-मुनियों ने महापुनीत महा- (पुण्यदायक) व्रत प्रमाणित किया है। 

2. कार्तिक की पूर्णिमा के दिन किए हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल प्राप्त होता है।

3. जो कोई व्यक्ति कार्तिक की पूर्णिमा की संध्याकाल के समय प्रतिष्ठित मंदिर में दीप दान करे, तो उस व्यक्ति को पूर्व जन्म में किए हुए पापों का फल या पुनर्जन्मादि का कष्ट नहीं होता है।

4. छ: तपस्विनी कृत्तिकाओं को कार्तिक की माता माना जाता है। यह हैं- शिवा, सम्भूति, प्रीति, संतति, अनसूया और क्षमा। इन छहों कृत्तिकाओं का चंद्रोदय के समय गन्धपुष्पादि से पूजन करने से मनुष्य के शौर्य, वीर्य और धैर्यादि की वृद्धि होती है।

5. कार्तिक की पूर्णिमा के दिन अपनी या परायी कन्या को सजाकर भलीभाँति कन्यादान करने वाले व्यक्ति को महान पुण्य प्राप्त होता है।

6. कार्तिक की पूर्णिमा से प्रारंभ करके प्रत्येक पूर्णिमा के दिन नक्त्तव्रत करने वाले व्यक्ति का संपूर्ण मनोरथ सिद्ध होता है। 

7. कार्तिक की पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्नान का बहुत बड़ा महत्व है।

2021 में कार्तिक की पूर्णिमा स्नान का शुभ मुहूर्त:-

इस बार इस दिन स्‍नान करने का शुभ मूहूर्त 19 नवंबर 2021 (शुक्रवार) को ब्रह्म मुहूर्त से दोपहर 02:29 तक रहेगा। अगर व्यक्ति किसी पवित्र घाट या नदी में स्नान नहीं कर सकता, तो घर में ही स्नान के समय पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करके उत्तम फल प्राप्त कर सकता है।

Conclusion:-

हमने कार्तिक की पूर्णिमा के महत्व का विस्तृत वर्णन कर दिया है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप कार्तिक की पूर्णिमा का लाभ अवश्य उठायें। यदि इस लेख में कोई त्रुटि हो तो उसे अवश्य बताएं और उसका सुधार स्वयं कर लें। Thank You!

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