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High blood pressure (Hypertension) - Symptoms, causes and Homeopathy treatment in hindi

उच्च रक्तचाप [High Blood Pressure]:-

जब किसी व्यक्ति का रक्तचाप (Blood Pressure) सामान्य रक्तचाप से अधिक हो जाता है, तो उसे उच्च रक्तचाप या High blood pressure कहा जाता है।
यह दो प्रकार का होता है -
1. अंतर्निहित या सामान्य उच्च रक्तचाप,
2. अस्वाभाविक या असामान्य उच्च रक्तचाप।
Hypertension


1. अंतर्निहित या सामान्य उच्च रक्तचाप:-

जब मन में हल्का उत्साह या उत्तेजना हो, किसी भी प्रकार की घबराहट या भय हो, भोजन करने के बाद अत्यधिक खुशी (जो कभी-कभी मृत्यु की ओर ले जाती है), दिलचस्प दृश्य देखना, तेज गंध या गंध होने पर, मधुर या कठोर आवाज सुनना, क्रोध, स्त्री प्रसंग के दौरान, ठंडे पानी से नहाने से अक्सर रक्तचाप या दबाव बढ़ जाता है, ऐसे प्राकृतिक रक्तचाप को उस समय बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता, अन्यथा यदि इसे रोक दिया जाए तो नुकसान की संभावना अधिक होगी।

2. अस्वाभाविक या असामान्य उच्च रक्तचाप:-

जो लोग कहते हैं कि हमें रक्तचाप है (blood pressure), उनका वास्तव में मतलब यह है कि उनका रक्तचाप सामान्य रूप से उच्च है और स्थायी हो गया है या हो रहा है या दौरे पड़ रहे हैं और यह रोग वास्तव में एक भयानक बीमारी है। उनमें यह बीमारी धीरे-धीरे ही बढ़ी है।

उच्च रक्तचाप (High blood pressure) के लक्षण:-

इसे यंत्र से नापकर जाना जा सकता है। इसके अलावा रोगी में और भी लक्षण दिखाई देते हैं -
1. चक्कर आना,
2. सिरदर्द,
3. नींद न आना,
4. किसी भी कार्य में रुचि की कमी,
5. सांस की तकलीफ,
6. पाचन का बिगड़ना,
7. चिड़चिड़ापन,
8. सीने में दर्द
9. थोड़ी सी मेहनत से हांफने जैसे लक्षण हो सकते हैं।

उच्च रक्तचाप (High blood pressure) का प्रकार:-

किसी भी उम्र में 140 सिस्टोलिक और 90 डायस्टोलिक को सामान्य उच्च रक्तचाप माना जाता है। इसके बाद blood pressure, गम्भीर हाई ब्लड प्रेशर (serious high blood pressure) का रूप धारण करने लगता है। 

उच्च रक्तचाप (High blood pressure) का कारण:-

1. जब तक शरीर की धमनियों और रक्त वाहिकाओं की स्थिति प्राकृतिक, लचीली बनी रहती है, उनके छिद्र पूरी तरह से खुले रहते हैं, तब तक हृदय को रक्त को आगे बढ़ाने के लिए अत्यधिक दबाव डालने की आवश्यकता नहीं होती है और रक्त बहुत आसानी से प्रवाहित हो जाता है। यह अपनी प्राकृतिक गति से शरीर के सभी अंगों तक पहुंचता है और उसे पोषण देता रहता है।

जब धमनियों और रक्त वाहिकाओं के छिद्र पतले और संकरे हो जाते हैं, उनकी दीवारों का लचीलापन कम हो जाता है, कठोरता हो जाती है, तो हृदय को अधिक दबाव डालकर रक्त वाहिकाओं के माध्यम से रक्त को धकेलना पड़ता है, और यह अतिरिक्त दबाव हृदय द्वारा लगाया जाता है। इसे हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं। इस पोजीशन में रहने से दिल धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।

2. रक्त वाहिकाओं और उनके छिद्रों की कठोरता का एकमात्र कारण हमारा कृत्रिम और अप्राकृतिक जीवन और अनियमित आहार है।

3. उम्र के साथ धमनियां सख्त हो जाती हैं और इन धमनियों में कैल्शियम या यूरिक एसिड की परतें जमकर सख्त हो जाती हैं और कोलेस्ट्रॉल जमकर उन्हें संकरा कर देता है।
धमनियों के इस सख्त होने को आर्टेरियो स्क्लेरोसिस कहा जाता है।

जब कठोर धमनियां रक्त के धक्का को सहन करने में असमर्थ होती हैं, तो कभी-कभी वे फट जाती हैं जिससे कभी-कभी रोगी की तुरंत मृत्यु भी हो सकती है।

4. मैदा से बना खाना, तेल-मशाला, चीनी, खट्टा, तली-भुनी चीजें, रबड़ी, मलाई, कॉफी, चाय, सिगरेट आदि का अधिक मात्रा में सेवन हाई ब्लड प्रेशर का कारण होता है।

5. अधिक बार-बार भोजन करना।

6. अत्यधिक मादक द्रव्यों का सेवन।

7. अत्यधिक व्यायाम।

8. असंयम।

9. मानसिक विकारों जैसे चिंता, भय, क्रोध आदि का लगातार बने रहना।

10. मूत्राशय के रोग।

11. उपदंश।

12. कब्ज और मस्तिष्क रोग इस रोग के प्रमुख कारण हैं।

उच्च रक्तचाप (High blood pressure) का उपचार:-

1. सबसे पहले उपरोक्त कारणों को समाप्त करें।

2. इस रोग के उपचार में द्रुतगामी औषधियों से प्रायः केवल हानि ही होती है और राहत केवल अस्थायी होती है। लेकिन अवसर पर उनका सहारा लिया जा सकता है।
ध्यान रहे कि ''रोगी के संपूर्ण अस्वास्थ्यता का उपचार करना चाहिए''।
3. खाने के सामान्य नियमों का पालन करें जैसे - खाना चबाकर खाएं और खाना खाते समय कम पानी पिएं और खाना खाने के बाद कम से कम 100 कदम चलें।

4. सुबह अपनी ताकत के अनुसार खुली हवा में टहलें।

5. दिन में खूब सारा पानी नींबू के साथ मिलाकर पिएं।

6. सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ दें। दिन में बार-बार न सोएं।

7. शांत और खुश रहें।

8. कब्ज न होने दें।

9. सप्ताह में एक या दो दिन उपवास करें और कुछ फलों का रस पिएं।

10. गहरी नींद लें।

11. अच्छे आंवले, हर्र, बहेड़ा, इन तीनों को बीज से निकाल कर अलग-अलग धूप में सुखा लें और फिर इन सबको मिलाकर चूर्ण बना लें. 10 ग्राम रोजाना रात को आधा किलो पानी में भिगो दें और सुबह उस पानी को छानकर पी लें। कठिन उच्च रक्तचाप इससे ठीक हो जाता है।

उच्च रक्तचाप (High blood pressure) के लिए होम्योपैथिक दवाएं:-

 दवाओं को ध्यान से पढ़ें और लक्षणों का अपनी बीमारी से मिलान करें।

1. बैराइटा म्यूर 6X-

बूढ़ों की इस शिकायत में यह दवा बहुत फायदेमंद होती है। जब रोगी रात को सोने के लिए बिस्तर पर लेट जाता है तो उसके सिर में तेज दर्द होने लगता है। सिस्टोलिक दबाव बहुत अधिक होता है, डायस्टोलिक दबाव बहुत कम होता है। सिर में सिर दर्द से ज्यादा भारीपन होता है। पेट में खालीपन महसूस होता है।

2. लैकेसिस 200,1M-

 यह उच्च रक्तचाप की भी मुख्य औषधि है। इसका मुख्य लक्षण है - नींद में या नींद से उठने पर हर बीमारी बढ़ जाती है, दर्द बढ़ जाता है, इसलिए रोगी को सोने से डर लगने लगता है। हृदय क्षेत्र में संकुचन की अनुभूति, जिससे हृदय धड़कने लगता है, साथ ही घबराहट भी बनी रहती है। अनियमित दिल की धड़कन की शिकायत। इसे रोजाना सुबह एक बार 200 की शक्ति में लें।

3. ऑरम मेट 200-

कोई भी मेहनत जैसे ऊंचाई पर चढ़ना, मेहनत करना आदि से व्यक्ति को छाती में भारी बोझ लगने लगता है, ऐसा लगता है कि अगर वह आराम नहीं करेगा, तो छाती फट जाएगी और खून बह जाएगा। 2-3 सेकंड के लिए रुका हुआ महसूस होना, फिर दिल जोर से धड़कने लगता है। अधिजठर में खालीपन की भावना। रात में सांस की तकलीफ। इसे 200 की शक्ति में 2-4 बूँद हर सुबह एक बार लें।

4. ग्लोनाइन 200-

इसका मुख्य लक्षण है - हाथ की उंगलियों के अन्त तक, पूरे शरीर में नाड़ी की धड़कन महसूस होती है। धूप की तपिश से सिर में दर्द होता है। धड़कन के साथ सांस लेने में दिक्कत होती है। परिश्रम या पहाड़ी पर चढ़ने से हृदय की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और बेहोशी के दौरे पड़ते हैं। इसकी तीन खुराक 200 शक्ति में रोज दें।

5. बेलाडोना 200 -

इसका मुख्य लक्षण है, चेहरा और आँखें लाल हो जाती हैं, आंखें फूल जाती हैं, गले की नसें फड़कने लगती हैं, मन उत्तेजित हो जाता है, मुंह और गला सूखने लगता है लेकिन रोगी पानी नहीं पीना चाहता। दर्द कहीं भी तुरन्त आता है और चला जाता है। तेज धड़कन जो सिर में बार-बार अनुभव होती है। सांस लेने में दिक्क्त। जरा सी मेहनत से दिल की धड़कन बढ़ जाती है। 200 शक्ति में प्रतिदिन तीन बार इसका सेवन करें।

6. विरेट्रम विरिडी 200 -

पूरे शरीर की नसों में कंपन, खासकर दाहिनी जांघ में। दिल में लगातार धीमा और जलन वाला दर्द। चेहरा नीला और फूला हुआ है। छाती पर भारी बोझ महसूस होना। प्यास लगती है लेकिन पानी पीने के बाद उल्टी होती है। सांस लेने में तकलीफ। इसे 200 शक्ति में दिन में दो बार लें।

7. जेल्सिमियम 1M -

किसी भी बुरी खबर को सुनने से मानसिक आघात, रक्तचाप में वृद्धि, साथ ही सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन, सिर सुन्न होना, पश्चकपाल में दर्द, नींद न आना, प्यास न लगना। सप्ताह में एक बार सुबह इसे खिलाएं।

8. नेट्रम म्यूर 200 -

इसका मुख्य लक्षण है - नमक खाने की अत्यधिक इच्छा, हमेशा चिंता, क्रोध को हृदय में रखने से रक्तचाप की बीमारी हो जाती है। दिल की धड़कन पूरे शरीर को हिला देती है। लेटते ही दिल धड़कना बंद कर देता है ऐसा अनुभव। इसकी एक खुराक रोजाना लें।

9. आर्सेनिक एल्बम 200 -

रक्तचाप से बहुत बेचैन, आंखों के आसपास सूजन, पैरों में सूजन, सांस लेने में तकलीफ, रात को सोते समय घुटन होना। सीढ़ियां चढ़ने पर दर्द बढ़ जाता है। इसकी दो खुराक प्रतिदिन लें।

10. क्रैटिगस Q -

यह धमनियों की दीवारों से हानिकारक तत्वों को घोलकर उन्हें हटा देता है जिससे धमनियों की जकड़न दूर हो जाती है। धीमी गति से नाड़ी, हल्का परिश्रम करने पर सांस लेने में कठिनाई, लेकिन यदि नाड़ी की गति नहीं बढ़ती है तो इस दवा की 20 बूंद दिन में तीन बार लें।

11. एसिड फॉस 200 -

नर्वस सिस्टम के कमजोर होने के कारण ब्लड प्रेशर की बीमारी, तेजी से बढ़ रहे बच्चों में, हस्तमैथुन के बाद घबराहट  होना। इसकी दो खुराक प्रतिदिन लें।
नोट - जब तक दवा से फायदा हो तब तक दवा लेते रहें। जब रोग दूर हो जाए तो कुछ और दिनों के सेवन के बाद दवा लेना बंद कर दें। यदि दवायें आपके समझ में न आयें तो किसी विद्वान होम्योपैथिक डाक्टर से चिकित्सा करायें।

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