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Causes, prevention and treatment of joint pain in hindi । जोड़ों का दर्द

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 जोड़ों का दर्द : एक कठिन बीमारी:-

प्राय: हमारे शरीर के जोड़ों में दर्द होना एक आम बात है। शरीर के जोड़ों में होने वाले अधिक दर्द को अर्थराइटिस (Arthritis) अथवा गठिया (Gout) भी कहा जाता है, क्योंकि असल में जोड़ों में बार - बार दर्द प्रायः अर्थराइटिस और गठिया के कारण ही हुआ करता है। यह बीमारी सबसे अधिक मोटे लोगों या जो लोग पहले अधिक मोटे थे, उनको अपना शिकार बनाती है। इसका एक प्रमुख कारण है कि यदि आपकी किडनी यूरिक एसिड इत्यादि हानिकारक पदार्थों का शरीर से निष्कासन नहीं करती है तो आपको अर्थराइटिस या गठिया की बीमारी होने लगती है। 

treatment of joint pain in hindi

जैसे - जैसे लोगों की उम्र बढ़ती जाती है, उनमें अर्थराइटिस होने का खतरा भी बढ़ने लगता है। एक भौगोलिक सर्वे के मुताबिक देश की लगभग 35 फीसद आबादी इस रोग से पीड़ित है, जिसमें 65 साल से अधिक उम्र के लोग इससे अधिक ग्रसित हैं। आस्ट्रियो आर्थराइटिस से 60 साल से अधिक उम्र के 12 % और 30 साल उम्र तक के लोग 6% इससे पीड़ित हैं। यह बीमारी ठंड बढ़ने के साथ बढ़ने लगती है।

जोड़ों में दर्द के लक्षण:-

1. समझदार व्यक्ति स्वयं समझ जाता है कि हमारे जोड़ों में दर्द हो रहा है।

2. जोड़ों में अधिक दर्द।

3. जोड़ों पर सूजन।

4. काम करते या चलते - चलते अचानक में दर्द और फिर सूजन।

5. हाथ और पैरों में विकृति के साथ दर्द और सूजन, साथ में अर्थराइटिस का होना।

जोड़ों में दर्द के कारण:-

1. शरीर का अधिक वजन। 

2. अपने शरीर से अधिक भार ढोना। 

3. शारीरिक मेहनत बहुत कम करना या शारीरिक मेहनत बहुत अधिक कर देना। 

4. अधिक देर तक साइकिल चला देना अधिक देर तक ड्राइविंग करना या अधिक देर तक बैठे रहना। 

5. गलत तरीके से व्यायाम करना। 

6. कंप्यूटर पर ज्यादा समय तक गलत दिशा में बैठकर अधिक देर तक काम करना। 

7. स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में ब्लैक बोर्ड और मेज सही स्थिति में ना हो तो उन्हें भी कमर दर्द और कन्धों इत्यादि में दर्द होने लगता है, इससे बच्चों के कमर दर्द, गर्दन और हाथों में भी दर्द होने लगता है। 

8. शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से भी जोड़ों में दर्द होने लगता है। 

9. किडनी का अच्छी तरह से कार्य न करना, जिससे कि वह यूरिक एसिड और कैल्शियम ऑक्सलेट को शरीर में ही छोड़ देती है और ये पदार्थ धीरे धीरे जोड़ों में जमकर गठिया जैसी बीमारी बना देते हैं।

10. वीर्य तथा धातु (धाध) का अधिक मात्रा में क्षय।

जोड़ों में दर्द से बचाव:-

1. सबसे पहले अपनी बीमारी को अच्छी प्रकार से समझने का प्रयास करें कि हमारे जोड़ों में दर्द वाली बीमारी का क्या कारण है। 

2. झुकने वाला काम अधिक देर तक मत करें। 

3. ज्यादा समय तक एक ही स्थिति में ना बैठे, नहीं तो जोड़ो, घुटने और कमर में दर्द जरूर होगा। 

4. डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से उनके बताए अनुसार और व्यायाम के नियमों का पालन करते हुए व्यायाम करें। 

5. आवश्यकता हो तो समय-समय पर कुछ दवाओं का भी सेवन करें। 

6. वजन को नियंत्रण में रखें अथवा अपने शरीर के वजन को बढ़ाने से बचें। 

7. दर्द पर नियंत्रण रखें। 

8. आवश्यकता के अनुसार फिजियोथैरेपी इत्यादि जांच को कुछ समय समय पर करा कर देखते रहे। 

9. पैर की बनावट को ध्यान में रखकर ही जूते और चप्पल पहने, क्योंकि कुछ जूते और चप्पल की डिजाइन अच्छी नहीं होती और इससे आपके पैरों में दर्द होने लगता है। 

10. अधिक देर तक घुटनों के बल ना बैठे।  

11. घुटनों के लिए सबसे अच्छा व्यायाम है टहलना। ज्यादा से ज्यादा टहलें और सुबह या शाम के वक्त नियम से टहलें। अधिक दूर तक मत टहलें, हरी घास इत्यादि पर बिना जूते के टहले, जूते - चप्पल पहन कर टहलना हो तो अच्छी प्रकार के जूते और चप्पल का इस्तेमाल करें अथवा मिट्टी पर टहलना हो तो नंगे पांव टहलें।

12. अपने वीर्य को अधिक मात्रा में क्षय करने से बचें। हस्तमैथुन इत्यादि कुकर्म मत करें, मैथुन भी बहुत संयम पूर्वक करें। 

13. स्त्री हों या पुरूष; धातुस्खलन या धाध गिरने की बीमारी का अच्छी प्रकार होम्योपैथिक इलाज करायें। 

14. खान-पान पर विशेष ध्यान दें, ऋतु के अनुकूल भोजन करें। 

अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव करके जोड़ों के दर्द से बचाव:-

1. आप टहलते हुए फोन पर बात कर सकते हैं, लेकिन आप यातायात के नियमों का उल्लंघन मत करें।

2. टेलीविजन देखने के दौरान विज्ञापन के समय टहल सकते हैं, ताकि आपको बैठे-बैठे अधिक देर तक जोड़ों का दर्द की समस्या ना बन जाए। एक घंटे के कार्यक्रम में कम से कम 5 से 10 मिनट जरूर टहल लें।

3. चढ़ने के लिए सीढ़ियों का प्रयोग करें, सीढ़ियां नहीं चढ़ सकते तो कम से कम सीढ़ी से उतरने की आदत डालें, हो सकता है आप सीढ़ियों से चढ़ने उतरने के लायक ना हो तो आप जबरदस्ती मत करें और लिफ्ट का ही प्रयोग कर लें। 

4.  बाजार जाना हो तो विंडो शॉपिंग को प्राथमिकता दें, इससे शॉपिंग के समय टहलना भी हो जाएगा।

5. भोजन के बाद बैठने की आदत छोड़ दें, और भोजन कर लेने के बाद टहलने या कुछ समय विश्राम करने की आदत डालें। 

जोड़ों के दर्द में व्यायाम के फायदे:-

व्यायाम करने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं। 

2. नियम पूर्वक व्यायाम करने से जोड़ों पर लगने वाले हल्के झटकों से कोई नुकसान नहीं होता और जोड़ों और मांसपेशियों में लचक और मजबूती आती है। 

3.बुढ़ापे में शरीर का संतुलन व्यायाम करने से सुव्यवस्थित रहता है और अनेक रोग जैसे बुढ़ापे में जोड़ों का दर्द, प्रोस्टेट दर्द और हाइड्रोसील, हर्निया इत्यादि रोग अच्छे और नियम पूर्वक व्यायाम करने से नहीं होते। 

4. डायबिटीज और हृदय रोग को नियम पूर्वक व्यायाम करने से रोका जा सकता है। 

5. यदि आप व्यायाम नियम पूर्वक कर रहे हैं और यदि आपका खान-पान ठीक-ठाक है तो आपको अर्थराइटिस हो ही नहीं सकता। 

6. अधिक से अधिक रोगों के इलाज के लिए होम्योपैथिक दवाओं और आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करें। आयुर्वेदिक दवाओं में आपके आसपास की जड़ी बूटियां ही शामिल होनी चाहिए क्योंकि अनेक कंपनियां ठगी के नाम पर अनेक आयुर्वेदिक दवाइयां बना रही हैं जो शरीर में वास्तव में तो काम करती नहीं, नुकसान जरूर कर देती हैं। होम्योपैथिक दवाइयां यदि नियम पूर्वक और बुद्धिमानी पूर्वक में दी जाए तो रोग को जड़ से समाप्त करने के बाद वह शरीर पर अनेक विकारों को भी दूर कर देती हैं।

Conclusion :-

तो मित्रों! कैसा लगा हमारा यह लेख ? हमें विश्वास है कि आपको इस लेख से अवश्य फायदा होगा।

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