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पैरिफेरल आट्रिज: ठण्डी के मौसम में विशेष बचाव

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पैरिफेरल आट्रिज क्या है ?

पैरिफेरल आट्रिज एक प्रकार का सर्दियों के मौसम में होने वाला हृदय से सम्बन्धित रोग है, जिसे Cardiac disease की श्रेणी में ही रखा जाता है। जैसा कि नाम से विदित है, यह रोग भी गम्भीरतम रोग है।

 पैरिफेरल आट्रिज होने का कारण :-

1. सर्दियों के मौसम में अधिक ठंड की वजह से हाथों और पैरों की नसें सिकुड़ जाती हैं जिसे हम मेडिकल भाषा में पैरिफेरल आट्रिज कहते हैं। इसकी वजह से ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक हो जाता है या बढ़ जाता है। 

पैरिफेरल आट्रिज

ब्लड प्रेशर ज्यादा बढ़ जाने से हृदय पर दबाव भी बढ़ता है, और जब हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, तो एंजाइना और हर्ट अटैक की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।

2. अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और मधुमेह।

3. तैलीय खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन।

4. शारीरिक परिश्रम बहुत कम करना।

5. अधिक मात्रा में धूम्रपान करना।

6. फास्टफूड का अधिकाधिक सेवन।

7. चिंता, तनाव भी इस रोग को गम्भीर बना देते हैं ।

पैरिफेरल आट्रिज के लक्षण:-

1. एंजाइना पेन, और हर्ट अटैक के कुछ लक्षण।

2. कार्डियक अस्थमा, 

3. सीवियर हाईपरटेंशन,

4. साॅंस फूलना,

5. पैरों में सूजन।

6. बेहोशी, घबराहट व सीने में दर्द और दबाव महसूस होना।

7. उलझन और घबराहट।

पैरिफेरल आट्रिज से बचाव:-

1. ठंड से बचाव के लिए पूरे शरीर पर गर्म कपड़े पहने।

2. ठंड शुरू होने के साथ ही ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल शुगर और HBA1C आदि की जांच कराकर अपने चिकित्सक से परामर्श ले लें।

3. एनजाइना पेन होने की स्थिति में डिस्प्रिन को पानी में घोलकर पी लें। इस उपचार से एनजाइना से हर्ट अटैक के खतरे को 60%  तक कम किया जा सकता है।

4. यदि आप सर्दी के मौसम में सुबह टहलने जाते हैं तो भोर में (अर्ली मार्निंग) मत जाएं और कुहासे से बचें। 

5. इकोस्प्रिन, कलोपिडोग्रेल और नाइट्रोग्लिसरिन आदि दवाओं का संभलकर सेवन करें क्योंकि ये दवाएँ बार-बार खून पतला करती हैं  और ब्लड प्रेशर को भी कुछ बढ़ाती है। 

6. प्रायः कई मामलों में देखने में आया है कि इन दवाओं के अधिकाधिक सेवन से आंतों में छेद हो जाता है, और मल के रास्ते खून आने लगता है। इसे ओकल ब्लड कहते हैं। इससे धीरे-धीरे मरीज में रक्त की कमी होने लगती है। एनीमिया हो जाने पर मरीज को एंजाइना पेन हो सकता है, जिससे हर्ट अटैक की सम्भावना बढ़ जाती है। ऐसे लक्षण मिलने पर रोगी नियमित रूप से और चिकित्सीय सलाह से आयरन की गोली का सेवन करें, या विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराये।

Conclusion :-

वैज्ञानिक सर्वेक्षण और जाॅंच के अनुसार सर्दियों में 30 से 35% तक हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ जाती है। हम आपको बता दें कि लोग लापरवाही बहुत करते हैं और थोड़ी सी लापरवाही के चलते कई मरीजों की मौत हो जाती है। अगर थोड़ी बहुत सावधानी बरती जाए तो इन अस्वाभाविक मौतों को रोका जा सकता है या कम किया जा सकता है।

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