Welcome !  Multi Useful Gyan Site पर आपका स्वागत है। आप यहां पर हिन्दू धर्म व अन्य धर्म विषयक और अनेक रोचक जानकारियां पायेंगे। अतः इस वेबसाइट को सब्सक्राइब (Subscribe) करें और Notification को ON/Allow भी करें !

Translator

Shri Narayana Kavach: व्याधिहर वैष्णव कवच स्तोत्र

                  Donate us

 बिना दवा के रोग दूर कैसे करें

 यदि आप यह ढूंढ रहे हैं कि रोगों को बिना दवाओं के कैसे दूर करें तो इसका भी उपाय है; परंतु इस उपाय को जानने से पहले हमें यह जानना चाहिए कि रोगी कौन है, और रोगियों का शाकाहार से क्या संबंध है। तो देखिए जो शाकाहारी है वे लोग भी रोगी होते हैं और जो शाकाहारी नहीं है वह लोग भी रोगी होते हैं। परंतु कुछ लोग शाकाहारी है और वे सुखी है ,और कुछ लोग मांसाहारी है वे भी सुखी है।

 अतः सुखी और रोगी होने के कई कारण होते हैं, परंतु मैं यहां पर जिस स्तोत्र का वर्णन करूंगा उसका लाभ केवल शाकाहारी और धार्मिक व्यक्ति ही  उठा सकेंगे।

इस स्तोत्र का नित्य स्नान के बाद आचमन ,ध्यान करने के बाद नित्य पूजा पाठ के समय इसका केवल एक बार पाठ करने से गंभीर रोग भी दूर हो जाते हैं।

यह व्याधिहर  वैष्णव कवच स्तोत्र श्री गरुड़ पुराण से लिया गया है ।


व्याधिहर  वैष्णव कवच स्तोत्र पाठ की विधि :-

पहले स्नान करें, उसके बाद  आचमन करें फिर उसके बाद संकल्प ( पूजा पाठ वाला ) करना चाहिए ।

Shri Narayana Kavach



भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी का ध्यान -


→ वासुदेव सुतं देव कंसचाणूरमर्दनम्।देवकीपरमानन्दम् कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।। 

गोविन्दम् गोकुलानन्दम् वेणुवादनतत्परम् । राधिकारञ्जनम् श्यामम् वन्दे गोपालनन्दनम् ।।

नारायणम् नमस्कृत्यम् नरं चैव नरोत्तमम् । देवी सरस्वतीं व्यासं ततो जय मुदीरयेत्।।


अनेक रोगों को दूर करने वाला व्याधिहर वैष्णव कवच स्तोत्र :- 


→    विष्णुर्मामग्रत: पातु कृष्णो रक्षतु पृष्ठत:। हरिर्मे रक्षतु शिरो हृदयं च जनार्दन: ।।

मनो मम हृषीकेशो जिह्वां रक्षतु केशव:। पातु नेत्रे वासुदेव:श्रोत्रे सड़्कर्षणो विभु: ।।

प्रद्युम्न: पातु मे घ्राणमनिरूद्धस्तु चर्म च । वनमाला गलस्यान्तं श्रीवत्सो रक्षतादध: ।।

पार्श्व ं रक्षतु मे चक्रं वामं दैत्यनिवारणम् । दक्षिणं तु गदा देवी सर्वासुरनिवारिणी ।।

उदरं मुसलं पातु पृष्ठं मे पातु लाड़्गलम् । ऊर्ध्वं रक्षतु मे शार्ड़्ग जड़्घे रक्षतु नन्दक: ।।

पाष्र्णी  रक्षतु शंखश्च पद्यं मे चरणावुभौ ।सर्वकार्यार्थसिद्धर्थं पातु माम् गरूण: सदा ।।

वराहो रक्षतु जले विषमेषु च वामन: । अटव्यां नरसिंहश्च सर्वतः पातु केशव: ।।

हिरण्यगर्भो भगवान् हिरण्यं मे प्रयच्क्षतु । सांख्याचार्यस्तु कपिलो धातुसाम्यं करोतु मे ।।

श्वेतद्वीत निवासी। च श्वेतद्वीपं नयत्वज: । सर्वान सूदयतां शत्रून मधुकैटभमर्दन:।।

सदाकर्षतु विष्णुश्च  किल्बिषं मम् विग्रहात् । हंसो मत्स्यस्तथा कूर्म: पातु माम् सर्वतो दिशम् ।।

त्रिविक्रमस्तु मे देव: सर्वपापानि कृतन्तु । तथा नारायणो देवो बुद्धिं पालयतां मम्।।

शेषो मे निर्मलं ज्ञानं करोत्वज्ञाननाशनम् । वडवामुखो नाशयतां कल्मषं यत्कृतं मया ।।  

पद्भ्यां ददातु परमम् सुख मूर्ध्नि मम प्रभु: । दतात्रेय: प्रकुरूतां सपुत्रपशुबान्धवम्।। 

सर्वानरिन् नाशयतु राम: परशुना मम । रक्षोघ्नस्तु दाशरथि: पातु नित्यं महाभुज:।।

शत्रून हलेन मे हन्याद्रामो यादव नन्दन : । प्रलम्बकेशीचाणूरपूतनाकंसनाशन: ।।

                   कृष्णस्य यो बालभाव: स मे कामान् प्रयच्क्षतु।।

अन्धकारतमोघोरं पुरूषं कृष्णपिंगलम् । पश्यामि भयसंत्रस्त: पाशहस्तकमिवान्तकम्।।

ततोअ्हं पुणडरीकाक्षमच्युतं शरणं गत:। धन्योअ्हं निर्भयो नित्य यस्य मे भगवान हरि: ।।  

ध्यात्वा नारायणं देवं सर्वोपद्रवनाशनम् । वैष्णवं कवच वद्धवा विचरामि महीतले ।। 

अप्रधृष्योस्मि  भूतानां सर्वदेवमयो ह्यहम् । स्मरणाद्देवदेवस्य विष्णोरमिततेजस : ।।


Conclusion -

इस स्तोत्र का पाठ रोगी स्वयं कर सकता है। इसे किसी भी समय शुद्ध अवस्था में पढ़ा जा सकता है ।  यदि रोगी इसका पाठ करने में असमर्थ हो तो उसके घर का कोई भी परिजन रोगी के लिए पाठ कर सकता है।

यदि परिवार का कोई भी सदस्य इस स्तोत्र का नित्य पाठ करेगा तो अभी पूरा परिवार सुखी रहेगा ।

इस स्तोत्र का तीव्र चमत्कारिक लाभ पाने के लिए सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण या दीपावली या जन्माष्टमी के दिन अनगिनत या सामर्थ के अनुसार या 27 बार पाठ कर लेना चाहिए, जिससे कि यह सिद्ध हो जाए। इस स्तोत्र के पाठ से कोई भी विपरीत हानि नहीं होती है अत: बिल्कुल भी डरना नहीं चाहिए ।


Also read-

All Benefits of Honey


                  Donate us

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ