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Narayana Stotra : श्री नारायण स्तोत्र, भगवान विष्णु जी का परम शक्तिशाली स्तोत्र

  श्री नारायण स्तोत्र :-


समस्त विघ्नों, पापों, कलिकाल के दोषों को नष्ट करने वाले और परम भक्ति प्रदान करने वाले इस नारायण स्तोत्र को भगवान श्री हरि ने स्वयं श्री महेश्वर जी को सुनाया है ।

नारायण स्तोत्र, Narayana stotra
वह स्तोत्र इस प्रकार है- 


→                          ऊॅं नमो वासुदेवाय नम: संकर्षणाय च।।

प्रद्युम्नायादिदेवायनिरूद्धाय नमो नमः ।

नमो नारायणायैव नराणां पतये नमः ।।

नर पूज्याय कीर्त्याय स्तुत्याय वरदाय च 

अनादिनिधनायैव पुराणाय नमो नमः

सृष्टिसंहारकर्त्रे च ब्रहम्ण: पतये नम:।

नमो वै वेदवेद्याय शंखचक्रधराय च।।

कलिकल्मषहर्त्रे च सुरेशाय नमो नम: । 

संसारवृक्षच्छेत्रे च मायाभेत्रे नमो नम:।।

बहुरूपाय तीर्थाय त्रिगुणायागुणाय च।

ब्रह्मविष्ण्वीशरूपाय मोक्षदाय नमो नम:।।

मोक्षद्वाराय धर्माय निर्वाणाय नमो नम: ।

सर्वकामप्रदायैव परब्रह्मस्वरूपिणे।।

संसारसागरे घोरे निमग्नं मां समुद्धर।

त्वदन्यो नास्ति देवेश नास्ति  त्राता जगत्प्रभो ।।

त्वामेव सर्वगं विष्णुं गतोहं शरण गत:।

ज्ञानदीपप्रदानेन तमेमुक्तं प्रकाशाय ।।

।।  ॐ नारायणाय नम: ।।

हे वासुदेव! हे संकर्षण !आपको नमस्कार है। हे प्रदुम्न !आदिदेव, अनिरुद्ध! आपके लिए नमस्कार है ।


 हे नारायण! हे नराधिपति !आपको नमन है। कीर्तन करने योग्य, मनुष्यों से पूजनीय ,स्तुति करने योग्य ,वर देने वाले आदि तथा अंत से रहित सनातन प्रभु को बारंबार नमस्कार है ।


सृष्टि और संहार कर्ता ब्रह्मा के भी स्वामी तथा शंख चक्र गदा धारी भगवान विष्णु को नमस्कार है ।नमस्कार है। कलिकाल के दोषों को नष्ट करने वाले, देवो के ईश!आप को बारंबार प्रणाम है। 


संपूर्ण जगत रूपी मूल वृक्ष का छेदन करने वाले, माया का भेदन करने वाले, बहुत से रूपों को धारण करने वाले ,तीर्थ स्वरूप, सत्व ,रज् तथा तमोरूप समूह एवं वस्तुतः निर्गुण तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों रूपों में अवस्थित रहने वाले मोक्ष दायक, भगवान विष्णु परमेश्वर को नमस्कार है ।


मोक्ष के द्वार भूत ,धर्म स्वरूप, निर्वाणरूप, समस्त अभीष्टो को प्रदान करने वाले  परम ब्रह्मस्वरूप आपके लिए बारंबार नमस्कार है ।


इस गहन संसार सागर में मैं डूब रहा हूं ,आप मेरा उद्धार करें ।हे देवदेवेश्वर! हे जगत के स्वामी !आपके अतिरिक्त मेरा कोई भी रक्षक नहीं है। 


सर्वत्र व्याप्त रहने वाले हे भगवान विष्णु! मैं आपकी शरण में हूं ,हे भगवान ज्ञान रूपी दीपक को प्रज्वलित कर मेरे अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर मुझे प्रकाशित कर दें ।


प्रिय मित्रों ! 

आप इसे कंठस्थ करके या देखकर इस स्तोत्र का पाठ करें और समस्त बाधाओं को दूर करके भगवान की भक्ति प्राप्त करें । 

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